
न्यूज डेस्क: भारत के ऊर्जा और बिजली क्षेत्र (Power Sector) में इस समय एक अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। ग्रीन एनर्जी (Green Energy), न्यूक्लियर पावर और ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए सरकार से लेकर निजी कंपनियों तक ने कई बड़े कदम उठाए हैं।
यदि आप भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर मार्केट पर नजर रखते हैं, तो जुलाई 2026 की ये बड़ी घोषणाएं आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। देश के पावर ग्रिड को अनलॉक करने से लेकर दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीक के निर्माण तक, आइए जानते हैं ऊर्जा क्षेत्र की हर बड़ी हलचल (India Energy Sector Update) को विस्तार से।
ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर: CERC ने अनलॉक की 15.7 GW फंसी हुई बिजली
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (CERC) ने देश के ट्रांसमिशन नेटवर्क को बड़ी राहत देते हुए एक ऐतिहासिक वन-टाइम फ्रेमवर्क (One-Time Framework) पेश किया है।
- क्या है फैसला: इस नए नियम के तहत लगभग 15.7 गीगावाट (GW) की फंसी हुई ट्रांसमिशन कनेक्टिविटी को मुक्त (Unlock) किया जाएगा।
- वजह: यह कनेक्टिविटी उन पुराने लेटर्स ऑफ अवार्ड (LoAs) के कारण ब्लॉक थी, जो आगे चलकर पावर परचेज एग्रीमेंट (PPAs) में तब्दील नहीं हो सके।
- समय सीमा: यह आदेश 1 जनवरी 2019 से 31 मई 2025 के बीच जारी उन LoAs पर लागू होगा, जिनके पीपीए 12 महीने से अधिक समय से साइन नहीं हुए हैं। डेवलपर्स को फैसला लेने के लिए 60 दिनों का समय मिलेगा।
हाइड्रो पावर: NHPC और लोअर सिलेरू परियोजना की बड़ी कामयाबी
जलविद्युत क्षेत्र (Hydro Power) से दो बेहद महत्वपूर्ण खबरें सामने आई हैं:
- अरुणाचल में 1,720 MW का कमला प्रोजेक्ट: एनएचपीसी लिमिटेड (NHPC Limited) ने त्रिपुरा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TSECL) के साथ 40 साल का पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) साइन किया है। यह एग्रीमेंट 10 जुलाई 2026 को ‘डेस्टिनेशन त्रिपुरा: बिजनेस कॉन्क्लेव 2026’ के दौरान हुआ। 26,069.50 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस प्रोजेक्ट से सालाना 6,869.92 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होगी।
- लोअर सिलेरू हाइड्रो प्रोजेक्ट (आंध्र प्रदेश): इस परियोजना के विस्तार के तहत 220 मीट्रिक टन (MT) के यूनिट-5 स्टेटर (Stator) को सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। एपीजेनको (APGENCO) द्वारा संचालित इस स्टेशन की क्षमता को दो 115 मेगावाट की यूनिट जोड़कर 460 MW से बढ़ाकर 690 MW किया जा रहा है।
न्यूक्लियर पावर: कैगा में रचा गया नया इतिहास
न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) ने कर्नाटक के कैगा (Kaiga) यूनिट 5 और 6 प्रोजेक्ट में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है।
रिकॉर्ड कंक्रीट पोर (Concrete Pour): > दक्षिण-पश्चिम मानसून की भारी बारिश के बावजूद, विशेष इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग करके भारतीय प्रेशराइज्ड हैवी वॉटर रिएक्टर (PHWR) के लिए अब तक का सबसे बड़ा निरंतर 7,250 क्यूबिक मीटर का रिएक्टर फाउंडेशन कंक्रीट पोर पूरा किया गया। यह ‘मेक इन इंडिया’ के तहत 700-700 MW की दो नई परमाणु इकाइयों के निर्माण को तेजी से आगे बढ़ाएगा।
सौर ऊर्जा: MNRE ने बढ़ाई ALMM लिस्ट-II छूट की तारीख
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने सौर डेवलपर्स (Solar Developers) के अनुरोध पर बड़ा फैसला लिया है। राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NISE) के पोर्टल को Approved List of Models and Manufacturers (ALMM) लिस्ट-II छूट के आवेदनों के लिए दोबारा खोल दिया गया है। डेवलपर्स अब 23 जुलाई 2026 तक इसके लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जिससे पुराने निवेश और खरीद प्रतिबद्धताओं वाले प्रोजेक्ट्स को सुरक्षा मिलेगी।
दूसरी तरफ, गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (GUVNL) ने अपने 250 मेगावाट के विंड पावर ऑक्शन को पूरा कर लिया है, जहां सबसे कम टैरिफ 3.51 रुपये प्रति किलोवाट घंटा (Rs 3.51/kWh) दर्ज किया गया। इसमें पॉवरिका, एनएलसी इंडिया और जुनिपर ग्रीन एनर्जी सबसे कम बोली लगाने वाले बनकर उभरे हैं।
मेक इन इंडिया: पुणे में 5 GWh की BESS फैसिलिटी और LONGi की नई तकनीक
बैटरी स्टोरेज और सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भारत अब आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है:
- एम्पीयरऑवर एनर्जी (AmpereHour Energy): कंपनी ने पुणे के चाकन में अपनी 5 GWh क्षमता वाली बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) मैन्युफैक्चरिंग और इंटीग्रेशन फैसिलिटी का उद्घाटन किया है। यह प्लांट यूटिलिटी-स्केल और कमर्शियल अनुप्रयोगों के लिए पूरी तरह ‘मेक इन इंडिया’ कैबिनेट और कंटेनराइज्ड बैटरी ब्लॉक्स का निर्माण करेगा।
- LONGi की ACM तकनीक: वैश्विक दिग्गज लोंगी (LONGi) ने अपनी एडवांस्ड कॉन्टैक्ट मैट्रिक्स (ACM) सोलर सेल तकनीक का बड़े पैमाने पर उत्पादन (Mass Production) शुरू कर दिया है। इस सेल ने रिकॉर्ड 27.6% की कन्वर्जन एफिशिएंसी हासिल की है, जिससे सोलर मॉड्यूल का आउटपुट 3 से 5 वाट तक बढ़ जाएगा।
कॉरपोरेट हलचल: अदाणी, एनटीपीसी और जेएसडब्ल्यू के मेगा प्रोजेक्ट्स
- अदाणी एंटरप्राइजेस (AEL): अदाणी समूह ने फ्रांस की क्लीन-टेक कंपनी ‘डाइऑक्सीकल’ (Dioxycle) के साथ साझेदारी कर भारत के पहले रिन्यूएबल-पावर्ड फॉर्मिक एसिड प्लांट को विकसित करने की घोषणा की है। यह प्लांट कैप्चर की गई कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और ग्रीन बिजली की मदद से कम कार्बन वाले केमिकल का उत्पादन करेगा।
- एनटीपीसी (NTPC): एनटीपीसी के बोर्ड ने छत्तीसगढ़ में लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट के स्टेज-III विस्तार के लिए 20,456.70 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश को मंजूरी दी है, जिसके तहत दो 800 मेगावाट के कोयला आधारित प्लांट लगाए जाएंगे।
- जेएसडब्ल्यू एनर्जी (JSW Energy): जेएसडब्ल्यू की सहायक कंपनी JEPEL को बोंडाडा रिन्यूएबल से 443.74 करोड़ रुपये का BESS ऑर्डर मिला है। इसके अलावा पेस डिजिटेक (Pace Digitek) की सहायक कंपनी लीनिएज पावर ने भी बोंडाडा के साथ BESS सप्लाई के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
राज्यों की पहल: असम बजट में ग्रीन एनर्जी पर 77,353 करोड़ का दांव
असम सरकार ने अपने 2026-27 के बजट में बिजली क्षेत्र के लिए एक क्रांतिकारी विजन पेश किया है। राज्य ने पावर सेक्टर के लिए 77,353 करोड़ रुपये के बड़े निवेश की योजना बनाई है। इस कार्यक्रम में 4,900 मेगावाट की कुल क्षमता वाली चार पंप स्टोरेज पावर (PSP) परियोजनाएं शामिल हैं। इसके साथ ही कैप्टिव रिन्यूएबल एनर्जी की खपत पर मिलने वाली बिजली ड्यूटी छूट को भी 31 मार्च 2029 तक के लिए बढ़ा दिया गया है।
दूसरी तरफ, पावर ग्रिड (PGCIL) ने कृष्णागिरी रिन्यूएबल एनर्जी जोन से बिजली निकालने के लिए टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली के तहत फेज-I ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट हासिल किया है, जिसे आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में 30 महीनों के भीतर पूरा किया जाएगा।







