
रायपुर (chaturpost.com)। छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण कार्यों पर नकेल कसने के लिए एक बेहद कड़ा और बड़ा फैसला लिया है। शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (Urban Development Department) ने राज्य के सभी नगरीय निकायों के लिए एक नया और सख्त आदेश (Government Order) जारी किया है। इस नए नियम के तहत अब नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में उपयोग होने वाले किसी भी प्लास्टिक या पॉलीमर उत्पादों की सरकारी खरीद (Government Procurement) से पहले उनकी कड़ी जांच की जाएगी।
विभाग ने साफ कर दिया है कि जब तक सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (CIPET) से हरी झंडी नहीं मिलेगी, तब तक ठेकेदारों के बिलों का भुगतान (Payment of Bills) पूरी तरह से रोक दिया जाएगा। आइए जानते हैं इस आदेश के पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी (Inside Story)।
🛠️ इन सामानों पर लागू होगा नया नियम (Targeted Products)
नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश (GENS-21/1449/2026-UAD) के अनुसार, निकायों में बुनियादी ढांचे के विकास (Infrastructure Development) के लिए खरीदे जाने वाले निम्नलिखित प्लास्टिक उत्पादों का टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है:
- uPVC और HDPE पाइप्स: पेयजल आपूर्ति (Water Supply) के लिए बिछाई जाने वाली मुख्य लाइनें।
- पानी की टंकियां: PVC और पॉलीथीन से बनी पानी भंडारण टंकियां (Water Storage Tanks)।
- DWC सीवरेज पाइप: भूमिगत जल निकासी (Underground Drainage) के लिए उपयोग होने वाले डबल वॉल कोरूगेटेड पाइप।
- इलेक्ट्रिकल कंड्यूट: सरकारी भवनों और स्ट्रीट लाइट में इस्तेमाल होने वाले बिजली के पाइप (Electrical Conduits)।
- प्लास्टिक डस्टबिन: स्वच्छता अभियान (Swachh Bharat Mission) के तहत खरीदे जाने वाले कचरा डिब्बे।
📋 आदेश की 5 सबसे बड़ी बातें: ठेकेदारों को क्यों लगी मिर्ची?
इस कड़े फैसले के बाद ठेकेदारों और सप्लायर्स के बीच हड़कंप मच गया है। इस आदेश की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं, जो सीधे तौर पर काम की गुणवत्ता (Quality Assurance) को प्रभावित करेंगी:
- CIPET रायपुर से ही होगा टेस्ट: सभी प्रकार की प्लास्टिक सामग्रियों का परीक्षण केवल सिपेट (CIPET Raipur) की एनएबीएल (NABL) या बीआईएस (BIS) मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में ही कराना होगा।
- दो तरफा निरीक्षण (Double Inspection): विभाग ने दो विकल्प दिए हैं। पहला- सामग्री भेजने से पहले की जांच (Pre-Dispatch Inspection) और दूसरा- साइट पर डिलीवरी के बाद का परीक्षण (Post-Delivery Testing)। दोनों ही स्थितियों में सिपेट की रिपोर्ट ही अंतिम मानी जाएगी।
- ISI मार्क अब काफी नहीं: आमतौर पर ठेकेदार सामानों पर केवल ISI मार्क दिखाकर बिल पास करा लेते थे। लेकिन अब सरकार ने साफ कर दिया है कि केवल ISI मार्क होना इस टेस्ट का विकल्प (Alternative) नहीं माना जाएगा। सिपेट की स्वतंत्र रिपोर्ट आवश्यक होगी।
- जेब से देना होगा जांच शुल्क: सबसे बड़ी बात यह है कि इस टेस्टिंग में आने वाले पूरे खर्च (Testing Charges) का वहन खुद ठेकेदार या आपूर्तिकर्ता को करना होगा। सरकार इसके लिए अलग से कोई फंड नहीं देगी।
- सामग्री रिजेक्ट तो पेनल्टी: यदि जांच के दौरान कोई भी सैंपल फेल (Test Failed) हो जाता है, तो पूरी सामग्री को तुरंत रिजेक्ट कर दिया जाएगा। ठेकेदार को अपने खर्च पर निर्धारित समय सीमा के भीतर मानक स्तर की नई सामग्री बदलनी होगी।
💰 प्रमुख उत्पादों की टेस्टिंग फीस (CIPET Testing Fee Structure)
सरकार ने पारदर्शिता (Transparency) बनाए रखने के लिए सिपेट रायपुर द्वारा निर्धारित टेस्टिंग फीस की सूची भी जारी की है। इसमें 18% GST अलग से देय होगा:
| क्र. | उत्पाद का विवरण (Product) | संबंधित IS कोड (Standard) | कुल परीक्षण शुल्क (₹) |
| 1. | इलेक्ट्रिकल कंड्यूट पाइप (Rigid Plain) | IS 9537 (Part 3): 1983 | ₹ 5,100 |
| 2. | स्ट्रक्चर्ड-वॉल प्लास्टिक पाइपिंग (सीवरेज) | IS 16098 (Part 2): 2013 | ₹ 11,025 |
| 3. | पॉलीथीन सीवरेज पाइप (Industrial Effluents) | IS 14333: 2022 | ₹ 11,025 |
| 4. | रोटेशनल मोल्डेड पानी टंकियां (PE Tanks) | IS 12701: 1996 | ₹ 11,525 |
💡 सरकार को क्यों उठाना पड़ा यह कदम? (The Real Reason)
विशेषज्ञों (Technical Experts) का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में नगरीय निकायों में घटिया क्वालिटी के पाइप और पानी टंकियों की सप्लाई की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं। कई जगहों पर पाइपलाइन बिछाने के कुछ महीनों के भीतर ही वे दबाव के कारण फट जाती थीं, जिससे जनता के टैक्स के पैसे (Public Money) का भारी नुकसान होता था।
इस नए CG Government Rules के लागू होने से सरकारी कामकाज में जवाबदेही (Accountability) तय होगी। जब तक ठेकेदार सिपेट का ‘पासिंग सर्टिफिकेट’ नहीं सौंपेगा, तब तक उसका भुगतान अटका रहेगा। इससे अधिकारी और ठेकेदार के बीच होने वाली मिलीभगत पर भी पूरी तरह से रोक लगेगी।
📌 आम जनता और इंफ्रास्ट्रक्चर पर क्या होगा असर?
नगरीय प्रशासन विभाग के इस मास्टरस्ट्रोक से छत्तीसगढ़ के शहरों का इंफ्रास्ट्रक्चर काफी मजबूत होगा।
- लंबे समय तक चलेंगे विकास कार्य: अच्छी क्वालिटी के पाइप और टंकियों के इस्तेमाल से पानी की बर्बादी रुकेगी।
- सड़कों की खुदाई से मुक्ति: घटिया पाइप फटने के कारण बार-बार सड़कों को खोदना पड़ता था, अब इस समस्या से राहत मिलेगी।
- भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था: डिजिटल सर्टिफिकेशन और थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन (Third-Party Inspection) से भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होगी।
नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी नगर निगम कमिश्नरों, पालिका मुख्य अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपनी आगामी सभी निविदाओं (Tenders) और कार्यआदेशों (Work Orders) में इन शर्तों को अनिवार्य रूप से शामिल करें।







