
BMS Demands रायपुर/शक्ति: शक्ति जिले के वेदांता प्लांट में हुए भीषण बॉयलर धमाके के बाद अब भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने मोर्चा खोल दिया है। 19 श्रमिकों की मौत को संघ ने ‘मैनेजमेंट की लापरवाही’ बताते हुए आर-पार की लड़ाई का एलान किया है। BMS ने दो टूक कहा है कि यह हादसा नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों (Safety Standards) की अनदेखी का परिणाम है।
“एक करोड़ से कम कुछ भी मंजूर नहीं”
BMS छत्तीसगढ़ के प्रदेश महामंत्री दिनेश कुमार पाण्डेय ने कंपनी द्वारा घोषित राशि को नाकाफी बताया है। संघ की ओर से स्पष्ट चेतावनी (Clear Warning) दी गई है कि:
- प्रत्येक पीड़ित परिवार को कम से कम 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
- घायलों के इलाज का पूरा खर्च कंपनी उठाए और उन्हें उचित बीमा लाभ (Insurance Benefits) मिले।
- मृतक के परिजनों को योग्यता के आधार पर स्थायी नौकरी (Permanent Job) की लिखित गारंटी दी जाए।
अधिकारियों पर ‘गैर-इरादतन हत्या’ का केस दर्ज हो
हादसे पर कड़ा रोष (Strong Indignation) व्यक्त करते हुए संघ ने मांग की है कि केवल जांच काफी नहीं है। सुरक्षा में चूक करने वाले अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) का मामला दर्ज होना चाहिए। इसके साथ ही ‘फैक्ट्री एवं बॉयलर विभाग’ के विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी जांच (Technical Investigation) की मांग भी दोहराई गई है।
पूरे प्रदेश में ‘सेफ्टी ऑडिट’ की मांग
BMS ने सरकार से मांग की है कि छत्तीसगढ़ के सभी निजी संयंत्रों में तत्काल सुरक्षा ऑडिट (Safety Audit) कराया जाए। संघ का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति (Recurrence) न हो, इसके लिए दोषी कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए जाने चाहिए।
आंदोलन की तैयारी
मृतकों में अधिकांश अन्य राज्यों के प्रवासी और ठेका श्रमिक (Contractual Laborers) हैं। भारतीय मजदूर संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे श्रमिकों के हक के लिए चरणबद्ध आंदोलन (Phase-wise Protest) शुरू करेंगे। फिलहाल, BMS के इस कड़े रुख ने शासन और प्रशासन दोनों पर दबाव बढ़ा दिया है।
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