
CSPTCL रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनी के जिस विभाग में काम नहीं होने के कारण अतिरिक्त महाप्रबंधक का ट्रांसफर दूसरे विभाग में कर दिया गया, उसी विभाग में अब महाप्रबंधन का नया पद बना दिया गया है। इस पर कंपनी के ही अफसर सवाल खड़े करते हुए इसे जांच का विषय बता रहे हैं। पूछा जा रहा है कि जहां एजीएम के लिए काम नहीं है, वहां जीएम की नियुक्ति क्यों की जा रही है।
वित्त विभाग के लिए मंजूर किया गया है जीएम का पद
पूरा मामला ट्रांसमिशन कंपनी में महाप्रबंधक का नया पद स्वीकृत किए जाने से जुड़ा है। वित्त विभाग में जीएम के नए पद की मंजूरी जून हुई बोर्ड की बैठक में दी गई थी। इसके आधार पर इसी महीने नए पद की स्वीकृति का आदेश जारी किया गया है। बिजली की तीनों कंपनियों में पहले से फाइनेंस में ईडी पदस्थ हैं।
CSPTCL स्टाफ ज्यादा होने के कारण एजीएम का ट्रांसफर
मजे की बात यह है कि एक महिला अतिरिक्त महाप्रबंधक का RAPM में ट्रांसफर कर दिया गया था। इस ट्रांसफर के पीछे तर्क यह दिया गया कि वित्त में एजीएम सरप्लस हो गए हैं। वित्त में इतने एजीएम के लिए काम नहीं है। इसी कारण जीएम का पद स्वीकृत किए जाने पर सवाल किया जा रहा है कि ऐसे में अतिरिक्त पद की जरूरत क्यों है।
तीनों बिजली कंपनियों के वित्त विभाग में अफसरों की स्थिति
कंपनियों की बेवसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार तीनों कंपनी मिलाकर वित्त विभाग में तीन ईडी, दो जीएम, सात एजीएम, छह डीजीएम, सात मैनेजर और 13 Assistant Manager हैं। अब एक और जीएम का पद स्वीकृत कर दिया गया है। इससे जीएम की संख्या दो से बढ़कर तीन हो जाएगी।
इसी कारण हो रही है कंपनियों के एकीकरण की मांग
पावर सेक्टर के जानकारों का कहना है कि यह जनता के पैसे की बरबादी है। इसी कारण पहले बिजली बोर्ड के विखंडन का विरोध किया जा रहा था और कंपनियों के एकीकरण करने की मांग की जा रही है। बताते चलें कि राज्य में पांच बिजली कंपनियां थीं, अब इनकी संख्या तीन रह गई है। अभी भी एक कंपनी को मर्ज किया जा सकता है।
CSPTCL कंपनी में मैदानी स्टाफ का टोटा
एक तरफ कंपनी का स्थापना व्यय कम करने के लिए नई भर्ती नहीं की जा रही है। कंपनी में मैदानी स्टाफ के 50 प्रतिशत से ज्यादा पद खाली हैं। किसी तरह आउटसोर्सिंग और ठेके पर काम चल रहा है।
दूसरी तरफ अफसरों को प्रमोट करने के लिए नए- नए पद स्वीकृत किए जा रहे हैं। कंपनी में मैदानी कर्मचारियों के 12317 स्वीकृत पदों में से केवल 5747 पर नियमित कर्मचारी हैं। इस खबर को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें




