
रायपुर (चतुरपोस्ट ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ में पैर पसार रहे ऑनलाइन अपराधियों और ठगों को लेकर एक बेहद सनसनीखेज और आंखें खोल देने वाली खबर सामने आई है। यदि आप भी छत्तीसगढ़ के निवासी हैं और मोबाइल या इंटरनेट का उपयोग करते हैं, तो यह खबर आपके लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है। प्रदेश में डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) और ऑनलाइन ठगी की बाढ़ आ चुकी है, जिसका खुलासा खुद राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ विधानसभा (Vidhan Sabha) में किया है।
विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान 15 जुलाई 2026 को विधायक श्री अनुज शर्मा के अतारांकित प्रश्न संख्या 25 (क्र. 507) का लिखित जवाब देते हुए सूबे के उप मुख्यमंत्री व गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने राज्य के सभी जिलों में सक्रिय साइबर अपराधियों और उनसे जुड़े मामलों का पूरा ब्योरा पटल पर रखा है। सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़े इतने भयावह हैं कि इन्हें देखकर किसी के भी होश उड़ जाएं।
डेढ़ साल में 95 करोड़ से ज्यादा की ठगी! (Transition Words & Context)
छत्तीसगढ़ में साइबर क्रिमिनल्स किस कदर हावी हैं, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि 1 जनवरी 2025 से 25 जून 2026 तक (मात्र 18 महीनों में) प्रदेश के भोले-भाले नागरिकों से अरबों रुपये की चपत लगाई जा चुकी है। सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट के मामलों में कुल 95,37,33,296 रुपये (95 करोड़ रुपये से अधिक) की राशि बरामद की जानी अभी भी शेष है।
इसके परिणामस्वरूप (Consequently), पीड़ित अपनी गाढ़ी कमाई वापस पाने के लिए थानों और अदालतों के चक्कर काट रहे हैं। हालांकि (However), पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए कुछ अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा गया है और कुछ राशि वापस भी कराई गई है।
छत्तीसगढ़ साइबर क्राइम और ठगी के 5 सबसे बड़े खुलासे (Key Statistics)
विधानसभा में गृह विभाग द्वारा प्रस्तुत किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में साइबर अपराधों की स्थिति कुछ इस प्रकार है:
⚠️ छत्तीसगढ़ साइबर ठगी रिपोर्ट (01 जनवरी 2025 से 25 जून 2026 तक):
- 1 कुल दर्ज मामले: पूरे छत्तीसगढ़ में कुल 757 मामले डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के पंजीबद्ध किए गए हैं।
- 2 विवेचना और गिरफ्तारियां: पंजीबद्ध किए गए कुल मामलों में से केवल 185 मामलों में विवेचना पूर्ण कर अपराधियों को अभिरक्षा में लेकर माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।
- 3 डिजिटल अरेस्ट के डरावने आंकड़े: कुल दर्ज मामलों में से 31 मामले विशुद्ध रूप से “डिजिटल अरेस्ट” के दर्ज किए गए हैं, जिनमें अकेले 12,11,77,465 रुपये (12.11 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम धोखाधड़ी की गई है।
- 4 वापस दिलाई गई राशि: पकड़े गए अपराधियों से अब तक कुल 5,78,82,058 रुपये (5.78 करोड़ रुपये) की राशि प्रार्थियों को वापस दिलाने की कार्यवाही पूरी कर ली गई है।
- 5 करोड़ों की वसूली बाकी: ठगी गई रकम में से कुल 95,37,33,296 रुपये की बरामदगी किया जाना अभी भी बाकी है।
जिलों की स्थिति: राजधानी रायपुर और बिलासपुर बने ठगी के सबसे बड़े गढ़ (District-wise Data Analysis)
इसके अतिरिक्त (In addition to this), जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो राजधानी रायपुर और न्यायधानी बिलासपुर इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं:
- रायपुर जिला: कुल 142 मामले दर्ज हुए, जिनमें से 8 मामले ‘डिजिटल अरेस्ट’ के थे। रायपुर में डिजिटल अरेस्ट के जरिए कुल 5,82,05,000 रुपये लूटे गए, जिनमें से अब तक केवल 60,97,000 रुपये ही वापस दिलाए जा सके हैं, जबकि 24,49,15,106 रुपये की भारी रकम बरामद होना बाकी है।
- बिलासपुर जिला: रायपुर की तरह यहाँ भी कुल 142 साइबर मामले दर्ज हुए। इनमें 2 मामले डिजिटल अरेस्ट के थे। जिले में 1,05,41,572 रुपये वापस कराए जा चुके हैं, जबकि 14,10,14,089 रुपये की बरामदगी अब भी शेष है।
- दुर्ग जिला: दुर्ग में कुल 22 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 6 मामले डिजिटल अरेस्ट के रहे। यहाँ डिजिटल अरेस्ट के जरिए 1,45,98,547 रुपये उड़ाए गए। दुर्ग पुलिस ने बेहतरीन कार्य करते हुए पीड़ितों को 1,46,35,809 रुपये वापस दिलाए हैं।
- राजनांदगांव: यहाँ दर्ज 28 मामलों में से 2 डिजिटल अरेस्ट के थे, जहाँ कुल 1.04 करोड़ रुपये की ठगी हुई और लगभग 1.03 करोड़ रुपये की रिकवरी भी कर ली गई।
इनके अलावा, सरगुजा में 52, बस्तर में 44 और बलौदाबाजार में 41 साइबर ठगी के मामले दर्ज किए गए हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
बची हुई रकम वापस दिलाने के लिए पुलिस के पास क्या है प्रावधान?
विधानसभा में जब यह पूछा गया कि ठगी गई बची हुई राशि को वापस दिलाने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा क्या कार्यवाही करने का प्रावधान है, तो गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने स्पष्ट रूप से बताया कि पुलिस विभाग द्वारा अपराधियों को गिरफ्तार करने के बाद उनसे शेष राशि जब्त/बरामद की जाती है।
इसके बाद, न्यायालय के आदेशानुसार (Court Orders) उस जब्तशुदा राशि को कानूनी प्रक्रिया के तहत पीड़ितों यानी प्रार्थियों को वापस कराने का वैधानिक प्रावधान है। इसके लिए साइबर सेल और थानों की टीमें देश के अलग-अलग राज्यों (जैसे झारखंड का जामताड़ा, दिल्ली, और राजस्थान) में दबिश देकर बैंक खातों को फ्रीज करवाने और पैसे रिफंड करवाने की प्रक्रिया पर लगातार काम कर रही हैं।
चतुरपोस्ट सलाह: डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें?
एक अनुभवी न्यूज़ एडिटर के तौर पर हम चतुरपोस्ट के पाठकों से अपील करते हैं कि वे किसी भी अनजानी कॉल या डराने-धमकाने वाले संदेशों के झांसे में न आएं।
- कानूनन भारत की कोई भी पुलिस, सीबीआई (CBI), ईडी (ED), या कस्टम विभाग किसी भी व्यक्ति को वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं कर सकता।
- कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर पैसों की मांग नहीं करती।
- यदि आपके पास ऐसी कोई संदिग्ध कॉल आए, तो तुरंत अपने नजदीकी पुलिस थाने या राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें!







