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छत्तीसगढ़ के शहरों में EV क्रांति: साय सरकार का बड़ा फैसला, 30 प्रमुख जगहों पर खुलेंगे इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन, केंद्र देगा बंपर सब्सिडी!

रायपुर: छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) को बढ़ावा देने और पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में साय सरकार ने एक बेहद क्रांतिकारी कदम उठाया है। राज्य सरकार के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (Urban Administration and Development Department) ने प्रदेश के सभी नगर पालिक निगम क्षेत्रों और जिला मुख्यालयों में बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन (EV Charging Station) और चार्जिंग पॉइंट स्थापित करने की मेगा कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है।

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विभाग की सचिव आर. शंगीता (R. Shangeetha) के हस्ताक्षर से जारी एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आधिकारिक पत्र (Official Document) के माध्यम से राज्य के सभी नगर निगम आयुक्तों (Municipal Corporation Commissioners) और जिला मुख्यालयों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO) को तत्काल उपयुक्त जमीन चिन्हित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। सरकार की इस पहल से राज्य में Green Mobility को एक नया आयाम मिलेगा और ईवी वाहन चालकों को चार्जिंग की चिंता से बड़ी मुक्ति मिलेगी।

पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत मिलेगी भारी सब्सिडी (Financial Subsidy)

छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है। भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries) द्वारा संचालित पीएम ई-ड्राइव योजना (PM E-DRIVE Scheme) के अंतर्गत राज्य शासन के माध्यम से इन चार्जिंग स्टेशनों को स्थापित करने की कार्यवाही प्रस्तावित की गई है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केंद्र सरकार द्वारा भारी भरकम वित्तीय अनुदान (Financial Grant) दिया जा रहा है।

नगरीय प्रशासन विभाग के पत्र के अनुसार, योजना के प्रावधानों के तहत नगर निगम क्षेत्र श्रेणी ‘B’ (Category ‘B’ Cities) के अंतर्गत स्थापित होने वाले प्रत्येक चार्जिंग स्टेशन के लिए भारत सरकार द्वारा बंपर सब्सिडी दी जाएगी:

  • विद्युत अधोसंरचना (Upstream Infrastructure) की कुल लागत पर 80% तक का भारी अनुदान भारत सरकार उठाएगी।
  • चार्जिंग मशीन और आवश्यक उपकरणों (Charging Equipment) की कुल खरीद लागत पर 70% तक की सब्सिडी सीधे केंद्र सरकार की तरफ से प्रस्तावित है।

इस बड़ी वित्तीय राहत के कारण स्थानीय निकायों पर आर्थिक बोझ बेहद कम हो जाएगा और Sustainable Development का लक्ष्य तेजी से पूरा होगा।

हर शहर में 25 से 30 प्रमुख स्थलों का होगा चयन (Site Selection Criteria)

विभागीय आदेश के मुताबिक, शुरुआती चरण में प्रत्येक नगर पालिक निगम क्षेत्रों में टू-व्हीलर (2-Wheeler) और फोर-व्हीलर (4-Wheeler) इलेक्ट्रिक वाहनों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लगभग 25 से 30 सबसे प्रमुख और रणनीतिक स्थलों (Strategic Locations) पर चार्जिंग स्टेशन या चार्जिंग पॉइंट स्थापित करने का भव्य प्रस्ताव है।

सचिवालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि स्थलों का चयन पूरी तरह से जन-उपयोगिता और तकनीकी व्यवहार्यता (Technical Feasibility) को परखने के बाद ही किया जाएगा। इसके लिए स्थानीय प्रशासन को निम्नलिखित कड़े मानकों का पालन करना होगा:

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  • पर्याप्त पार्किंग क्षमता: स्थान का चयन करते समय सबसे पहली प्राथमिकता यह होगी कि वहां वाहनों को खड़ा करने की पर्याप्त क्षमता (Parking Capacity) उपलब्ध हो।
  • सार्वजनिक और सुगम्य स्थल: चार्जिंग स्टेशन ऐसे स्थानों पर बनाए जाएंगे जो आम जनता के लिए पूरी तरह से सुगम्य और सुरक्षित हों, जैसे- व्यस्त पार्किंग स्थल, केंद्रीय बस स्टैंड, बड़े बाजार क्षेत्र (Market Areas) और प्रमुख अस्पताल परिसर।
  • स्वामित्व की प्राथमिकता: जमीन के विवादों से बचने के लिए साफ तौर पर निर्देशित किया गया है कि केवल शासकीय (Government Land) या नगर निगम के पूर्ण स्वामित्व वाली भूमि को ही पहली प्राथमिकता (High Priority) प्रदान की जाए।

प्रत्येक स्टेशन की न्यूनतम क्षमता होगी 144 kW, इन कड़े नियमों का करना होगा पालन

छत्तीसगढ़ के शहरी क्षेत्रों में बनने वाले ये ईवी चार्जिंग स्टेशन अत्यधिक आधुनिक और हाई-पावर क्षमता वाले होंगे। सरकार ने इसके लिए कुछ कड़े तकनीकी मापदंड तय किए हैं, जिन्हें पूरा करना अनिवार्य होगा:

  • न्यूनतम क्षमता (Minimum Power Capacity): प्रस्तावित प्रत्येक चार्जिंग स्टेशन की न्यूनतम कुल विद्युत क्षमता 144 kW सुनिश्चित की जानी अनिवार्य है, ताकि वाहनों को सुपर-फास्ट स्पीड से चार्ज किया जा सके।
  • भूमि की आवश्यकता (Land Requirement): अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि चयनित प्रत्येक स्थल पर कम से कम 800 वर्गफुट (800 Sq. Ft.) की साफ और समतल भूमि उपलब्ध होनी चाहिए।
  • बिजली कनेक्शन की उपलब्धता: चयनित स्थान पर हाई-टेंशन या आवश्यक क्षमता के विद्युत कनेक्शन की उपलब्धता अथवा बिजली ग्रिड की निकटता (Proximity to Power Grid) सुनिश्चित होनी चाहिए, ताकि अधोसंरचना विकास में देरी न हो।
  • डिजिटल और फोटोग्राफिक डेटा: पारदर्शिता और त्वरित स्वीकृति के लिए अधिकारियों को प्रत्येक प्रस्तावित स्थल का पूरा पता, उसका सटीक अक्षांश-देशांतर (Latitude-Longitude Coordinates) और स्थल के कम से कम 02 लाइव फोटोग्राफ प्रस्ताव के साथ अनिवार्य रूप से संलग्न करने होंगे।

कलेक्टर्स के साथ समन्वय और वित्तीय व्यवस्था के निर्देश (Inter-Departmental Coordination)

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की ओर से जारी इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट फाइल (File No.: PROJ-206/4/2026-UAD) में वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी स्थिति साफ की गई है। केंद्र सरकार से मिलने वाली 70% और 80% की सब्सिडी के बाद, जो शेष व्यय राशि (Residual Cost) बचेगी, उसकी व्यवस्था करने की जिम्मेदारी संबंधित नगर निगमों की होगी।

इसके लिए संबंधित नगर निगम आयुक्तों को अपने-अपने जिले के कलेक्टर्स (District Collectors) के साथ बेहतर समन्वय (Coordination) स्थापित करने के लिए कहा गया है। वे जिला खनिज संस्थान न्यास (DMFT), अधोसंरचना मद या अन्य स्थानीय उपलब्ध वित्तीय स्रोतों व संसाधनों (Financial Resources) से आवश्यक बजटीय व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे, ताकि फंड की कमी के कारण यह जनहितैषी परियोजना अधर में न लटके।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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