
रायपुर | छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनभोगियों (Pensioners) के लिए एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने राज्य सरकार पर पेंशनरों के अधिकारों के हनन का आरोप लगाया है। फेडरेशन का कहना है कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम की गलत व्याख्या कर बुजुर्गों को उनके आर्थिक हक (Financial Rights) से वंचित रखा जा रहा है।
क्या है पूरा विवाद? (The Main Dispute)
फेडरेशन ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को एक कड़ा ज्ञापन (Memorandum) सौंपा है। इसमें साफ कहा गया है कि राज्य सरकार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49(6) का हवाला देकर जानबूझकर महंगाई राहत (Dearness Relief – DR) में देरी कर रही है।
अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश से सहमति (Consent) लेने का बहाना बनाकर राज्य के हजारों पेंशनरों को केंद्र की तुलना में कम डीआर दिया जा रहा है। यह सीधे तौर पर उनकी आर्थिक क्षति (Financial Loss) है।
बुजुर्गों की सामाजिक सुरक्षा पर खतरा (Social Security Risk)
सेवानिवृत्त कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई (Inflation) के दौर में समय पर महंगाई राहत न मिलना उनके जीवन स्तर को प्रभावित कर रहा है। फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही केंद्र के समान दरों पर डीआर स्वीकृत नहीं किया गया, तो आंदोलन और तेज होगा।
“पेंशनभोगियों की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करना न्यायसंगत नहीं है। सरकार को अन्य राज्यों की तर्ज पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए।” — कमल वर्मा, संयोजक, छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन
निष्कर्ष और मांग (Conclusion and Demand)
फेडरेशन ने स्पष्ट मांग की है कि छत्तीसगढ़ सरकार को स्वायत्त निर्णय (Autonomous Decision) लेते हुए केंद्र सरकार द्वारा घोषित दरों के अनुसार समय-समय पर महंगाई राहत जारी करनी चाहिए। इससे न केवल पेंशनरों का आर्थिक नुकसान रुकेगा, बल्कि उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।
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