कर्मचारी हलचलसोशल मीडिया

Power सेवानिवृत्‍तों के प्रमोशन आर्डर ने बढ़ा रखी है कईयों की चिंता: सवाल- कोर्ट के आदेश का पूरा पालन हुआ तो क्‍या होगा?

Power  रायपुर। छत्‍तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनी में हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए दनादन प्रमोशन आर्डर जारी किया जा रहा है। महीने- डेढ़ महीने में अलग- अलग श्रेणी के 500 से ज्‍यादा कर्मियों को प्रमोट किया जा चुका है। इनमें बड़ी संख्‍या में रिटायर भी शामिल हैं। 20 से 22 साल पहले रिटायर हो चुके कर्मचारियों को भी प्रमोट किया जा रहा है। इन सबके बीच एक ऐसा सवाल पूछा जा रहा है जो सेवारत लोगों की टेंशन बढ़ा रहा है।

पूरी खबर से पहले जाने क्‍या है मामला

दरअसल, पूरा मामला पदोन्‍न्‍ति में आरक्षण का है। बिजली बोर्ड से लेकर इसके कंपनी बनने तक, पदोन्‍नति में लगातार आरक्षण दिया जा रहा था। मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने पदोन्‍नति में आरक्षण को खारिज कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने 2004 की स्थिति में सूची तैयार करने और उसके हिसाब से प्रमोट और डिमोट करने का आर्डर  दिया है।

दो साल बाद कोर्ट के आदेश का पालन

कंपनी में पदोन्‍नति में आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट ने 2019 में एक आदेश जारी किया। इस मामले में अप्रैल 2024 में कोर्ट ने फाइनल आर्डर दिया। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि कोर्ट का आदेश एकदम स्‍पष्‍ट है इसके बावजूद इसके पालन के लिए कंपनी ने एक कमेटी बना दी। इस चककर में मामला करीब दो साल तक लटका रहा। अब कोर्ट के आदेश के परिपालन में कर्मचारियों को प्रमोट किया जा रहा है।

प्रमोशन से सेवानिवृत्‍तों को क्‍या लाभ

जानकारों के अनुसार प्रमोशन आर्डर जारी होने से सेवानिवृत्‍तों को किसी तरह का आर्थिक लाभ नहीं हो रहा है, उन्‍हें केवल पेपर प्रमोशन दिया जा रहा है, यानी केवल कागजों में उनका पद नाम बदल रहा है। इससे उनके पेंशन पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।  

इस वजह से बढ़ी टेंशन

हाईकोर्ट के आदेश पर अमल शुरू होने के साथ पावर कंपनी में कहीं खुशी- कहीं गम वाला माहौल है। सेवारत इंजीनियर, अफसर और कर्मचारी टेंशन में हैं, विशेष रुप से वे लोग जो पदोन्‍नति में आरक्षण का लाभ लेकर बड़े पदों पर पहुंच गए हैं। उन्‍हें टेंशन है कि कोर्ट के आदेश के एक हिस्‍से का पालन हो रहा है तो दूसरे हिस्‍से का भी पालन होगा।

कंपनी प्रबंधन भी टेंशन में

डिमोट करने के आदेश के पालन को लेकर कंपनी प्रबंधन भी टेंशन में है, वजह यह है कि डिमोट होने वालों में ज्‍यादातर बड़ी रैंक वाले अफसर और इंजीनियर शामिल हैं। कंपनी में जिन अफसरों और इंजीनियरों पर डिमोशन की तलवार लटक रही है उनमें ईडी और चीफ इंजीनियर रैंक वाले भी शामिल हैं। हाई कोर्ट के आदेश के पालन की जिम्‍मेदार भी इन्‍हीं लोगों के हाथों में है।

हाईकोर्ट के आदेश का पूरी तरह पालन करने की मांग

कर्मचारी संगठन और उनके नेता हाईकोर्ट के आदेश का पूरा पालन करने की मांग कर रहे हैं। यानी प्रमोशन से वंचित रहे लोगों को प्रमोशन देने के साथ आरक्षण लेकर प्रमोट होने वालों को डिमोट करना भी शामिल है। यही उनकी चिंता की वजह  है, क्‍योंकि डिमोट होने की स्थिति में रिकवरी भी होगी। इसका असर आरक्षण के दम पर प्रमोट होकर सेवानिवृत्‍त हो चुके लोगों पर भी पड़ेगा।

वेट एंड वाच की स्थिति

आरक्षण की वजह से पदोन्‍न्‍ति से वर्षों तक पदोन्‍नति से वंचित रहे कंपनी के कई पेंशनर इंतजार में हैं। एक पेंशनर ने कहा कि कोर्ट के आदेश का पूर्णरुप से पालन होना चाहिए, ऐसा नहीं होता है तो यह कोर्ट की अवमानना है। कई सेवानिवृत्‍त इस मामले को कोर्ट में लेकर जाने का मन बना चुके हैं। यह भी कहा जा रहा है कि कोर्ट इस मामले को स्‍वत: संज्ञान भी ले सकता है।

Back to top button