
रायपुर न्यूज़ डेस्क, chaturpost.com: छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी (Chhattisgarh State Power Company) के इंजीनियरों, कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। पावर कंपनी प्रबंधन ने अपनी ‘अंशदायी कैशलेस स्वास्थ्य योजना’ (CSPCHS) के सुचारू और पारदर्शी क्रियान्वयन को लेकर अब तक का सबसे सख्त रुख अपना लिया है। छत्तीसगढ़ राज्य पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (CSPTCL) के मुख्य अभियंता (मानव संसाधन) की तरफ से एक कड़ा आधिकारिक आदेश और नया दिशा-निर्देश (Strict Guidelines) जारी किया गया है।
इस नए आदेश के तहत योजना के अंतर्गत इंपैनल यानी सूचीबद्ध सभी निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों (Empaneled Hospitals) को कड़ी चेतावनी दी गई है। अगर अस्पतालों ने मेडिकल बिलों से जुड़ी कमियों और आपत्तियों का निराकरण तय समय सीमा के भीतर नहीं किया, तो उनका भुगतान सीधे निरस्त (Claim Rejected) कर दिया जाएगा। आइए इस पूरे आदेश, नए प्रोटोकॉल-7(i) की शर्तों और इससे कर्मचारियों व अस्पतालों पर पड़ने वाले असर को विस्तार से समझते हैं।
क्यों पड़ी नए आदेश की जरूरत? जानिए इनसाइड स्टोरी (Background Analysis)
इस प्रशासनिक ढिलाई के कारण (Administrative Delay) कैशलेस हेल्थ स्कीम (Cashless Health Scheme) के तहत होने वाले भुगतानों में अनावश्यक और अत्यधिक विलंब हो रहा था। अस्पतालों के क्लेम पेंडिंग पड़े रहने से न सिर्फ कंपनी का वित्तीय रिकॉर्ड प्रभावित हो रहा था, बल्कि कई बार मरीजों और उनके परिजनों को भी डिस्चार्ज या रीइंबर्समेंट के समय मानसिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इसी व्यवस्था को दुरुस्त और जवाबदेह बनाने के लिए मुख्य अभियंता (मा.सं.) छत्तीसगढ़ राज्य पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड ने पत्र क्रमांक 01-01/CSPCHS/2437 जारी कर सभी सूचीबद्ध अस्पतालों को अनुशासन का पाठ पढ़ाया है।
क्या कहता है पुराना नियम और प्रोटोकॉल-7? (Understanding Protocol-7)
बिजली कंपनी द्वारा जारी किए गए पत्र में पूर्व में जारी किए गए प्रोटोकॉल-7 (क्रमांक 01-01/CSPCHS/959 दिनांक 17.02.2026) का विशेष रूप से संदर्भ (Reference) दिया गया है। इस पुराने नियम के तहत बिलों के भुगतान की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए एक स्पष्ट ढांचा तैयार किया गया था।
- पुरानी व्यवस्था: छत्तीसगढ़ राज्य पावर कंपनी की कैशलेस योजना के तहत अस्पतालों के बिलों के भुगतान हेतु बिल जमा करने की दिनांक तय थी।
- समय सीमा: यदि कंपनी द्वारा बिलों पर कोई आपत्ति उठाई जाती थी, तो आपत्तियों का समुचित जवाब देने की दिनांक (जो भी बाद में हो), से 10 कार्य दिवसों (10 Working Days) के भीतर पूरी प्रक्रिया को संपन्न करने की व्यवस्था की गई थी।
- अस्पतालों की लापरवाही: इसके बावजूद यह देखा जा रहा था कि हेल्थ केयर ऑर्गनाइजेशन (जांच केंद्रों/अस्पतालों) द्वारा इन आपत्तियों का निराकरण निर्धारित समय-सीमा के भीतर नहीं किया जा रहा था। इसके परिणामस्वरूप (Consequently) बिलों के भुगतान की पूरी चेन अटक जाती थी।
नया कड़ा नियम: एक सप्ताह में देने होंगे दस्तावेज (New 7-Day Deadline)
अस्पतालों के इसी टालमटोल वाले रवैये को समाप्त करने के लिए पावर कंपनी ने अब दो चरणों वाली एक अत्यंत सख्त समय-सीमा लागू कर दी है। इसके तहत अब किसी भी बहानेबाजी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
1. एक सप्ताह के भीतर ईमेल से भेजें जवाब
पावर कंपनी के नए निर्देश के अनुसार, अब जैसे ही कंपनी किसी अस्पताल के मेडिकल क्लेम बिल पर कोई आपत्ति (Query or Objection) जारी करेगी, अस्पताल प्रबंधन के पास समय बहुत कम होगा। अस्पताल को आपत्ति जारी होने की तिथि से अधिकतम एक सप्ताह (Within One Week) के भीतर सभी आवश्यक और मांगे गए दस्तावेज (Required Documents) सामान्यतः ईमेल के माध्यम से कंपनी के संबंधित विभाग को प्रेषित करने होंगे।
2. दो सप्ताह का अल्टीमेटम: वरना क्लेम होगा सीधे रिजेक्ट
इस आदेश का सबसे महत्वपूर्ण और कड़ा हिस्सा समय-सीमा की अंतिम सीमा (Final Deadline) से जुड़ा हुआ है। पत्र में स्पष्ट शब्दों में लिखा गया है:
“आपत्तियों का समुचित अपेक्षित निराकरण किसी भी स्थिति में आपत्ति जारी करने की दिनांक से अधिकतम दो सप्ताह (14 Days) में नहीं होने पर आपके बिल को भुगतान हेतु निरस्त किया जा सकता है।”
बिल निरस्त होने के बाद नहीं मिलेगी कोई राहत (No Re-appeal Allowed)
इसका सीधा मतलब यह हुआ कि एक बार समय-सीमा चूकने पर अस्पतालों को अपनी लापरवाही का भारी वित्तीय नुकसान (Financial Loss) खुद उठाना पड़ेगा। कंपनी किसी भी बंद हो चुकी फाइल को दोबारा नहीं खोलेगी। यह सख्त कदम इसलिए उठाया गया है ताकि अस्पताल प्रबंधन अपने एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ को चुस्त-दुरुस्त रखें और बिजली कंपनी के कर्मचारियों के क्लेम को प्राथमिकता के आधार पर प्रोसेस करें।
अनुबंध का हिस्सा माना जाएगा यह नया प्रोटोकॉल (Part of Agreement)
छत्तीसगढ़ राज्य पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड ने साफ कर दिया है कि यह नया आदेश कोई अस्थायी व्यवस्था नहीं है। यह नया प्रोटोकॉल-7(i), अस्पतालों की सूचीबद्धता (Empanelment) के लिए पूर्व में किए गए मूल अनुबंध (Original Agreement) का एक अभिन्न हिस्सा माना जाएगा। अनुबंध की सभी संबंधित शर्तें और नियम इस नए प्रोटोकॉल के अनुसार स्वतः ही संशोधित (Automatically Amended) माने जाएंगे। यानी किसी भी अस्पताल के पास इस नियम को न मानने का कोई कानूनी विकल्प नहीं होगा।
पावर कंपनी के इस फैसले की प्रमुख बातें एक नजर में:
- प्रोटोकॉल का नाम: छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी अंशदायी कैशलेस स्वास्थ्य योजना (CSPCHS) प्रोटोकॉल-7(i).
- अस्पतालों के लिए पहली डेडलाइन: आपत्ति दर्ज होने के बाद अधिकतम 7 दिनों के भीतर ईमेल से जरूरी डॉक्यूमेंट्स भेजना अनिवार्य।
- फाइनल डेडलाइन: 14 दिनों (2 सप्ताह) के भीतर हर हाल में आपत्ति का निराकरण (Resolution) होना जरूरी।
- पेनल्टी/कार्रवाई: 14 दिन पूरे होने पर पेंडिंग मेडिकल बिल को स्थायी रूप से निरस्त (Permanent Rejection) कर दिया जाएगा।
- असर: भुगतानों में पारदर्शिता आएगी और कर्मचारियों के क्लेम का सेटलमेंट तेजी से (Fastest Settlement) हो सकेगा।
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए E-E-A-T एक्सपर्ट ओपिनियन (Expert Insights)
chaturpost.com की विशेषज्ञ टीम (Expert Panel) का विश्लेषण बताता है कि यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से बिजली कंपनी के सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा। अक्सर देखा जाता है कि कैशलेस हेल्थ स्कीम (Cashless Health Scheme) के नाम पर कई निजी अस्पताल मरीजों को भर्ती तो कर लेते हैं, लेकिन डिस्चार्ज के समय या उसके बाद बिलिंग की प्रक्रिया को लटकाए रखते हैं। जब अस्पतालों पर पेमेंट्स रुकने का डर होगा, तो वे मरीजों के कागजी काम को तेजी से निपटाएंगे।
इसके साथ ही, बिजली कंपनी के इस कड़े रुख से राज्य के अन्य सरकारी विभागों में चल रही स्वास्थ्य योजनाओं के लिए भी एक नजीर (Benchmark) स्थापित होगी। अब देखना यह होगा कि राजधानी रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ के बड़े कॉर्पोरेट और निजी अस्पताल इस 14 दिनों की कठिन समय-सीमा के भीतर अपने आईटी और अकाउंटिंग सिस्टम को कैसे ढालते हैं।
Disclaimer (अस्वीकरण): यह खबर छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड द्वारा जारी आधिकारिक पत्र क्रमांक 2437 के आधार पर तैयार की गई है। योजना से जुड़े कर्मचारी अधिक जानकारी के लिए अपने विभागीय कार्यालय या CSPCHS नोडल डेस्क से संपर्क कर सकते हैं।








