
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले माफियाओं और नकलचियों की अब खैर नहीं है। राज्य की विष्णुदेव साय सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता (Transparency) लाने के लिए अपना सबसे बड़ा और कड़ा कदम उठा लिया है। छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने राज्य में पेपर लीक और परीक्षाओं में होने वाली धांधली को रोकने के लिए बनाए गए कानून की आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी कर दी है।
राजपत्र में प्रकाशित इस आदेश के बाद, छत्तीसगढ़ में ‘छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2026’ पूरी तरह से प्रभावी यानी लागू हो गया है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के लाखों अभ्यर्थियों (Candidates) में न्याय और निष्पक्ष परीक्षा की उम्मीद जागी है।
20 मई 2026 से पूरे प्रदेश में हुआ प्रभावी (Effective)
सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चम्पावत के हस्ताक्षरित आदेश के अनुसार, राज्य सरकार ने 20 मई 2026 की तारीख को उस विशेष दिन के रूप में नियत किया है, जिससे इस कानून के सभी कड़े उपबंध और धाराएं पूरे प्रदेश में प्रवृत्त (In force) हो गई हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा (Chhattisgarh Assembly) ने इस कड़े विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया था। अब राज्यपाल की मंजूरी के बाद इसे राजपत्र (Gazette) में अधिसूचित कर दिया गया है, जिसके बाद छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) और व्यापम (CG Vyapam) जैसी सभी बड़ी सरकारी भर्ती परीक्षाएं इस कानून के दायरे में आ गई हैं।
क्या-क्या करना माना जाएगा गंभीर अपराध (Criminal Offence)?
इस नए कानून के तहत सरकारी या व्यावसायिक परीक्षाओं के दौरान की जाने वाली कई गतिविधियों को गैर-जमानती और गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है:
- पेपर लीक (Paper Leak): परीक्षा से पहले या परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र को लीक करना, बेचना या उसे सोशल मीडिया पर फैलाना।
- फर्जी अभ्यर्थी (Dummy Candidate): किसी असली परीक्षार्थी के स्थान पर किसी दूसरे फर्जी व्यक्ति (Solver) को परीक्षा में बैठाना।
- इलेक्ट्रॉनिक नकल (Electronic Cheating): ब्लूटूथ, मोबाइल, माइक्रो-चिप या किसी भी अन्य डिजिटल डिवाइस के माध्यम से परीक्षा हॉल में नकल करना या कराना।
- संगठित साजिश (Organized Crime): कोचिंग सेंटर्स, प्रिंटिंग प्रेस या परीक्षा केंद्रों के साथ मिलकर गिरोह (Gangs) के रूप में धांधली की योजना बनाना।
हाई-लेवल जांच एजेंसी करेगी मामलों की छानबीन (Investigation)
इस कानून की सबसे बड़ी यूटिलिटी (Utility) यह है कि इसमें जांच की प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और मजबूत बनाया गया है। कानून के प्रावधानों के मुताबिक, इन मामलों की जांच कम से कम उप निरीक्षक (Sub-Inspector) स्तर या उससे ऊपर के पुलिस अधिकारी ही करेंगे।
इसके अतिरिक्त, यदि कोई मामला बेहद पेचीदा या बड़ा पाया जाता है, तो राज्य सरकार के पास यह विशेष अधिकार होगा कि वह इसके लिए एक विशेष जांच एजेंसी (Special Investigation Agency) का गठन कर सके, ताकि समय सीमा के भीतर दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने की बड़ी पहल (E-E-A-T आस्पेक्ट)
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सदन में इस ऐतिहासिक कानून को लेकर स्पष्ट किया था कि सरकार का उद्देश्य केवल दंड (Punishment) देना नहीं है। बल्कि इस सख्त कानून का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ के उन लाखों मेहनती युवाओं का विश्वास बहाल करना है, जो रात-दिन पढ़ाई कर सरकारी नौकरियों की तैयारी करते हैं।
विगत वर्षों में परीक्षाओं में गड़बड़ी की जो शिकायतें सामने आती रही हैं, उन पर यह कानून एक फुल स्टॉप (Full Stop) लगाने का काम करेगा। अब राज्य में योग्यता (Merit) के आधार पर ही युवाओं का चयन सुनिश्चित हो सकेगा।
यह न्यूज़ रिपोर्ट छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) संख्या 253 में प्रकाशित आधिकारिक अधिसूचना संख्या RULE-505/18/2025-GAD-1 पर आधारित है। छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक और विश्वसनीय खबरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए जुड़े रहिए chaturpost।com के साथ।








