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भारत के नए थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ: छत्तीसगढ़ राजभवन से है उनका खास पारिवारिक कनेक्शन, जानें विस्तार से

रायपुर। भारतीय सेना को 30 जून 2026 को अपना 31वां चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) मिल गया है। जनरल धीरज सेठ ने सेना की कमान संभाली है। इस नियुक्ति के साथ ही छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए एक विशेष गर्व का विषय भी जुड़ा है। जनरल सेठ का छत्तीसगढ़ राज्य से एक अटूट और ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है।

छत्तीसगढ़ राजभवन से जुड़ा है आर्मी चीफका नाता

बहुत कम लोग जानते हैं कि नए सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, छत्तीसगढ़ के दूसरे राज्यपाल रहे लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) कृष्ण मोहन सेठ (KM Seth) के सुपुत्र हैं। छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद, प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने में केएम सेठ का बड़ा योगदान रहा है।

राज्य के पहले राज्यपाल दिनेश नंदन सहाय के कार्यकाल के बाद, 2 जून 2003 को केएम सेठ ने छत्तीसगढ़ के दूसरे राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला था। वे 24 जनवरी 2007 तक इस गरिमामयी पद पर रहे। आज उनके पुत्र का भारतीय सेना के शीर्ष पद पर पहुँचना, उस परिवार की सैन्य परंपरा की एक नई उपलब्धि है।

विरासत में मिली सैन्य सेवा (Military Legacy)

जनरल धीरज सेठ का सैन्य करियर उनकी विरासत का हिस्सा है। उनके पिता, लेफ्टिनेंट जनरल केएम सेठ खुद 1997 में भारतीय सेना के एडजुटेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। दिलचस्प बात यह है कि जब उनके पिता रिटायर हो रहे थे, तब जनरल धीरज सेठ सेना में बतौर कैप्टन अपनी सेवाएं दे रहे थे।

उनके परिवार का सैन्य योगदान केवल थल सेना तक सीमित नहीं है। उनके भाई, रियर एडमिरल रविनीश सेठ भारतीय नौसेना में फ्लैग ऑफिसर के तौर पर राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं।

रणनीतिक अनुभव और क्षमता विकास (Operational Expertise)

रक्षा मंत्रालय की प्रेस रिलीज के अनुसार, जनरल सेठ के पास करीब चार दशकों का विशाल अनुभव है। उन्होंने भारतीय सेना की युद्ध क्षमता (Combat Capability) और आधुनिकीकरण (Modernization) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उनकी कमांड संबंधी जिम्मेदारियों में रेगिस्तानी क्षेत्र में आर्मर्ड रेजिमेंट, पश्चिमी मोर्चे पर आर्मर्ड ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में काउंटर-इंसर्जेंसी फोर्स का नेतृत्व शामिल है। लेफ्टिनेंट जनरल के रूप में, उन्होंने ‘सुदर्शन चक्र कोर’ जैसी महत्वपूर्ण स्ट्राइक फॉर्मेशन की कमान संभाली थी।

वर्तमान चुनौतियां और भविष्य की राह

जनरल सेठ ने ऐसे समय में सेना की कमान संभाली है जब वैश्विक भू-रणनीतिक वातावरण (Global Geo-strategic Environment) बेहद गतिशील है। तकनीकी प्रगति और आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप के बीच, सीमावर्ती चुनौतियों से निपटना उनकी पहली प्राथमिकता होगी।

वे जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान ले रहे हैं, जिन्होंने 40 वर्षों से अधिक के शानदार करियर के बाद सेवानिवृत्ति ली है। अपनी नियुक्ति से पहले, जनरल सेठ पुणे स्थित दक्षिणी कमान के प्रमुख थे, जहाँ उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अपनी परिचालन तत्परता (Operational Readiness) का लोहा मनवाया था।

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आधुनिक युद्ध और तकनीक के विशेषज्ञ

जनरल सेठ को युद्ध के मैदान में आधुनिक तकनीक, विशेष रूप से ड्रोन और टैंक के समन्वित उपयोग (Integrated Use) का विशेषज्ञ माना जाता है। उनके पास डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज (DSSC) और पेरिस के कमांड एंड स्टाफ कोर्स से प्राप्त उच्च-स्तरीय प्रशिक्षण है, जो उन्हें एक ‘विज़नरी लीडर’ बनाता है।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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