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Oath Rule छत्तीसगढ़ में एल्‍डरमैन के लिए बड़ी खबर, सरकार ने तय की समय-सीमा; अब इतने दिनों में लेनी होगी शपथ

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (Urban Administration and Development Department – UADD) ने प्रदेश के विभिन्न नगरीय निकायों में मनोनीत या नामनिर्दिष्ट सदस्यों (Nominated Councillors) के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और समय-बद्ध (Time-bound Governance) आदेश जारी किया है। राज्य शासन द्वारा विभिन्न नगर पालिक निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों में नियुक्त किए गए पार्षदों को पद ग्रहण करने से पहले अनिवार्य रूप से शपथ या प्रतिज्ञान (Oath or Affirmation) लेना होगा।

प्रशासनिक प्रक्रियाओं में एकरूपता और तेजी लाने के उद्देश्य से विभाग के उप सचिव भागवत जायसवाल ने 8 जुलाई 2026 को महानदी भवन से एक नया आधिकारिक पत्र (क्रमांक: GENS-2101/4792/2026-UAD) जारी किया है। यह आदेश राज्य के सभी कलेक्टर्स, नगर निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMOs) को तत्काल प्रभाव से कड़े क्रियान्वयन के लिए भेज दिया गया है।

30 दिनों के भीतर शपथ लेना अनिवार्य

इस नए सरकारी आदेश का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु इसकी तय समय-सीमा (Deadlines) है। शासन द्वारा स्पष्ट निर्देशित किया गया है कि नियुक्ति या नामनिर्देशन आदेश जारी होने की तिथि से 30 (तीस) दिवस के भीतर सभी नामांकित पार्षदों को हर हाल में वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप शपथ दिलानी होगी। यदि कोई सदस्य इस तय समय के भीतर शपथ नहीं लेता है, तो उसे नियमों के तहत पद ग्रहण करने की अनुमति नहीं दी जा सकेगी।

जानिए किसे, किसके सामने लेनी होगी शपथ? (The Judicial Hierarchy)

अधिनियमों और विधिक प्रावधानों की जटिलताओं को दूर करने के लिए शासन ने नगर निगमों और नगर पालिकाओं के लिए अलग-अलग प्राधिकारी (Authorised Officials) तय किए हैं:

1. नगर पालिक निगम के नामांकित पार्षद (Municipal Corporations)

  • नगर निगमों में नियुक्त पार्षदों को छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 17-ख के अधीन निर्धारित प्रारूप में शपथ लेनी होगी।
  • इन सदस्यों को संबंधित जिले के कलेक्टर (Concerned Collector) के समक्ष अनिवार्य रूप से शपथ या प्रतिज्ञान कराया जाएगा।

2. नगर पालिका परिषद् एवं नगर पंचायत के पार्षद (Municipal Councils & Nagar Panchayats)

  • नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों में मनोनीत किए गए सदस्यों के लिए छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 55-क के तहत प्रारूप विहित है।
  • इन निकायों के पार्षदों को संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी (Sub-Divisional Magistrate – SDM) के समक्ष शपथ दिलाई जाएगी।

विधिक शक्तियों का प्रयोग कर सरकार ने लिया निर्णय (Legal Compliance)

इस आदेश की प्रतिलिपि आवश्यक समन्वय और तकनीकी अपलोडिंग के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय (इंद्रावती भवन) के संचालक, रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा एवं जगडलपुर के संयुक्त संचालकों और डेटा सेंटर के प्रोग्रामर को भी सूचनार्थ अग्रेषित की गई है ताकि वेबसाइट पर इसे तुरंत सार्वजनिक किया जा सके।

इस फैसले का धरातल पर क्या होगा असर? (Key Impact Analysis)

  • प्रशासनिक पारदर्शिता (Administrative Transparency): निकायों में खाली पड़े मनोनीत पदों पर नियुक्तियों के बाद काम जल्द शुरू हो सकेगा।
  • अधिकारियों की जवाबदेही: कलेक्टर्स और एसडीएम को 30 दिनों के भीतर आयोजन कराने की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे लेटलतीफी खत्म होगी।
  • स्थानीय विकास में तेजी: पार्षदों द्वारा समय पर पद ग्रहण करने से वार्डों और निकायों की विकास योजनाओं को गति मिलेगी।
Nominated Councillors Oath Rule Chhattisgarh

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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