
न्यूज डेस्क। (chaturpost.com) देश के सभी सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार ने अपनी अरबों-खरबों रुपए की सरकारी संपत्तियों (Government Assets) की सुरक्षा, ट्रैकिंग और हेराफेरी को रोकने के लिए एक बेहद कड़ा और आधुनिक डिजिटल सिस्टम लागू कर दिया है।
वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के अधीन महालेखा नियंत्रक कार्यालय (CGA) ने 19 मई 2026 को एक आधिकारिक कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) जारी कर SAMPATI मॉड्यूल को सभी सिविल मंत्रालयों और विभागों में पूरी तरह से रोल आउट (Roll out) करने का आदेश दे दिया है।
आइए जानते हैं कि आखिर यह ‘SAMPATI’ योजना क्या है और इससे सरकारी खजाने में होने वाली गड़बड़ियों पर कैसे लगाम लगेगी।
क्या है SAMPATI मॉड्यूल? (What is SAMPATI Module?)
सबसे पहले सरल भाषा में इसके नाम का मतलब समझ लेते हैं। SAMPATI का पूरा नाम System for Asset Monitoring, Presentation and Tracking e-Asset Register है। यह केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के लिए तैयार किया गया एक अत्याधुनिक डिजिटल पोर्टल (Digital Portal) है।
सरल शब्दों में समझें: अब तक सरकार के पास इस बात का कोई सेंट्रलाइज्ड रीयल-टाइम डेटा (Real-time data) नहीं होता था कि किस विभाग के पास कितनी जमीन, गाड़ियां, इमारतें या कंप्यूटर मौजूद हैं। लेकिन अब इस e-Asset Register के आ जाने से सरकार की हर एक छोटी-बड़ी संपत्ति की ऑनलाइन एंट्री होगी।

पुराने सिस्टम में क्या थी खामियां? क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
अब तक भारत सरकार में Cash basis of accounting (नकद आधारित लेखांकन) का पालन किया जाता था। इसमें यह तो पता चल जाता था कि किसी प्रोजेक्ट पर कितना खर्च (Capital Expenditure) हुआ है, लेकिन वास्तविक संपत्ति की मौजूदा स्थिति क्या है, इसकी सटीक जानकारी नहीं मिल पाती थी।
पुरानी व्यवस्था में निम्नलिखित बड़ी समस्याएं थीं:
- अधूरी जानकारी: सरकारी विभागों के पास मौजूद हेरिटेज एसेट्स (Heritage Assets – ऐतिहासिक इमारतें), इनटेंजिबल एसेट्स (Intangible Assets – जैसे कंप्यूटर सॉफ्टवेयर या पेटेंट) और लीज पर ली गई संपत्तियों का कोई रिकॉर्ड नहीं होता था।
- कागजों से गायब न होना: कोई गाड़ी या मशीन खराब हो गई या कबाड़ हो गई, तो भी उसे रजिस्टर से हटाया (Derecognition) नहीं जाता था।
- लायबिलिटी की अनदेखी: अगर किसी संपत्ति का पूरा भुगतान नहीं हुआ है, तो पुराना सिस्टम उसकी सही वैल्यू नहीं दिखा पाता था।
- प्रगति पर काम (CWIP): जो इमारतें या प्रोजेक्ट्स आधे अधूरे बने हैं (Capital Works-in-Progress), वे मुख्य खर्चों में ही दबे रह जाते थे, उनका अलग से हिसाब नहीं मिलता था।
इन सभी चुनौतियों (Challenges) को खत्म करने के लिए नया Transaction-linked Fixed Asset Register यानी SAMPATI लाया गया है।
SAMPATI के तहत किन संपत्तियों का रखना होगा हिसाब?
वित्त मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, Delegation of Financial Powers Rules, 2024 (DFPR) के नियम 8 के तहत आने वाले सभी नॉन-फाइनेंशियल फिक्स्ड और इनटेंजिबल एसेट्स को इसमें शामिल किया जाएगा।
संपत्तियों का वर्गीकरण: 12 मुख्य श्रेणियां (Classification of Assets)
सरकारी विभागों को अपनी सभी संपत्तियों को नीचे दी गई 12 मुख्य श्रेणियों में बांटना होगा ताकि मंत्रालयों के स्तर पर एकरूपता (Uniformity) बनी रहे:
- I. मोटर वाहन (Motor Vehicles): विभाग की सभी गाड़ियां, स्टाफ कार आदि।
- II. मशीनरी और उपकरण (Machinery and Equipment): भारी मशीनें और तकनीकी उपकरण।
- III. आईसीटी उपकरण (ICT Equipment): कंप्यूटर, लैपटॉप, सर्वर और टेलीकॉम डिवाइस।
- IV. भवन और संरचनाएं (Buildings and Structures): कार्यालय भवन, वर्कशॉप और क्वार्टर।
- V. बुनियादी ढांचा संपत्तियां (Infrastructural Assets): सड़कें, पुल और बड़े प्रोजेक्ट्स।
- VI. फर्नीचर और फिक्स्चर (Furniture & Fixtures): ऑफिस की मेज, कुर्सी, अलमारी आदि।
- VII. हथियार और गोला-बारूद (Arms and Ammunition): सुरक्षा बलों और मंत्रालयों के अधीन आने वाले हथियार।
- VIII. हेरिटेज संपत्तियां (Heritage Assets): ऐतिहासिक इमारतें, स्मारक और कलाकृतियां।
- IX. अन्य अचल संपत्तियां (Other Fixed Assets): जो कहीं और वर्गीकृत नहीं हैं।
- X. भूमि (Land): सभी प्रकार की सरकारी जमीन।
- XI. गैर-उत्पादित संपत्तियां (Non-produced Assets): भूमि के अलावा अन्य प्राकृतिक संसाधन।
- XII. अमूर्त संपत्तियां (Intangible Assets): सॉफ्टवेयर, पेटेंट और डिजिटल राइट्स।
कीमत तय करने के अनोखे नियम: सिर्फ ₹1 में दर्ज होंगी ये कीमती चीजें!
इस नए सरकारी आदेश (OM) में संपत्तियों की कीमत यानी Measurement of Cost को लेकर बेहद दिलचस्प और कड़े नियम बनाए गए हैं:
- ऐतिहासिक लागत (Historical Cost): सामान्य तौर पर संपत्ति को उसी कीमत पर दर्ज किया जाएगा जिस पर उसे खरीदा या बनाया गया था। अगर कुछ पेमेंट बाकी है, तो उसे ‘Unpaid amount’ वाले कॉलम में दिखाना होगा।
- सिर्फ ₹1 की वैल्यू (Nominal Value of ₹1/-): अगर किसी ऐतिहासिक इमारत (Heritage Asset), दान में मिली जमीन या ऐसी संपत्ति की पुरानी रसीदें या असली कीमत का पता लगाना असंभव है, तो उसे सरकारी रजिस्टर में प्रतीकात्मक रूप से ₹1 की कीमत पर दर्ज किया जाएगा ताकि वह रिकॉर्ड से गायब न हो सके।
- सॉफ्टवेयर और पेटेंट: खुद से बनाए गए कंप्यूटर सॉफ्टवेयर (Internally developed software) को तैयार होने के बाद और पेटेंट को रजिस्ट्रेशन के वक्त इस पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा।
आधे अधूरे काम (CWIP) पर कड़ा पहरा
अगर कोई बिल्डिंग या हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट अभी बन ही रहा है और पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है, तो उसे CWIP (Capital Works-in-Progress) कॉलम में डाला जाएगा।
जैसे ही वह प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा, उसे वहां से हटाकर मुख्य संपत्ति (Asset) की श्रेणी में डाल दिया जाएगा। इसके लिए हर विभाग के कार्यकारी अधिकारी (Executive Authority) को साल में एक बार Physical Verification यानी भौतिक सत्यापन करना होगा।

संपत्ति को रजिस्टर से कब हटाया जाएगा? (Derecognition Rules)
कोई भी सरकारी विभाग अपनी मर्जी से किसी संपत्ति को कबाड़ बताकर रजिस्टर से गायब नहीं कर पाएगा। Derecognition यानी संपत्ति को बही-खाते से हटाने के लिए सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) की लिखित मंजूरी और कानूनी प्रक्रिया जरूरी होगी। यह केवल तभी होगा जब:
- संपत्ति को बेच (Sale) दिया गया हो या ट्रांसफर कर दिया गया हो।
- संपत्ति पूरी तरह बेकार (Obsolete) हो चुकी हो।
- प्राकृतिक आपदा (Tsunami, Cyclone), आगजनी, दंगे या चोरी (Theft) में संपत्ति नष्ट हो गई हो।
2 लाख से ऊपर की संपत्तियों का बनेगा अलग वीआईपी डेटा
इस डिजिटल रिफॉर्म (Digital Reform) को सुचारू रूप से चलाने के लिए वित्त मंत्रालय ने एक थ्रेशोल्ड लिमिट (Threshold limit) तय की है। मंत्रालयों को समेकन (Consolidation) करते समय ₹2,00,000 (दो लाख रुपये) और उससे अधिक मूल्य की संपत्तियों को अलग से दिखाना होगा।
इससे कम कीमत वाली संपत्तियों को एक साथ जोड़कर “Others” वाले कॉलम में डाला जा सकेगा। इस डेटा की मदद से FRBM Rules, 2004 के तहत बजट डिवीजन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। वहीं, 16 दिसंबर 2022 से पहले खरीदी गई ₹5,000 से अधिक मूल्य और 1 वर्ष से अधिक जीवनकाल वाली पुरानी संपत्तियों (Legacy Assets) का भी वेरिफिकेशन कर इस रजिस्टर में एंट्री की जाएगी।
महालेखा नियंत्रक (CGA) की मंजूरी से जारी हुआ यह आदेश देश के सरकारी वित्तीय ढांचे को पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में 2026 का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।







