
रायपुर (chaturpost.com)। पूरे देश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी इन दिनों ‘स्मार्ट मीटर’ (Smart Meter) आम जनता से लेकर सियासी गलियारों तक सबसे बड़ी चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है। एक तरफ जहां उपभोक्ता बेतहाशा बढ़ते बिजली बिलों और तकनीकी कमियों को लेकर सड़कों पर हैं, वहीं दूसरी तरफ बिजली कंपनियां इसे सिस्टम अपग्रेडेशन का नाम दे रही हैं। जनता के इसी आक्रोश और असमंजस के बीच छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने अपने नए टैरिफ ऑर्डर में एक बेहद ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने बिजली कंपनियों की जवाबदेही तय करते हुए साफ कर दिया है कि स्मार्ट मीटरिंग के नाम पर उपभोक्ताओं का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि स्मार्ट मीटर को लेकर छत्तीसगढ़ की जनता की क्या आपत्तियां हैं, बिजली कंपनियों ने इस पर क्या दलीलें दी हैं और अंततः नियामक आयोग ने उपभोक्ताओं के हक में क्या बड़े आदेश जारी किए हैं।
जनता की अदालत में स्मार्ट मीटर: ये हैं 5 सबसे बड़ी आपत्तियां
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा टैरिफ ऑर्डर जारी करने से पहले रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर जैसे संभागों में आयोजित जनसुनवाई में स्मार्ट मीटर का मुद्दा सबसे ज्यादा गरमाया रहा। विभिन्न उपभोक्ता संरक्षण संगठनों, राजनीतिक दलों और आम नागरिकों ने आयोग के समक्ष बिजली कंपनी (CSPDCL) के खिलाफ शिकायतों का अंबार लगा दिया। जनता की मुख्य आपत्तियां निम्नलिखित हैं:
- अचानक बढ़े हुए बिलों का झटका: उपभोक्ताओं का सबसे बड़ा और सीधा आरोप है कि जैसे ही उनके घरों में पुराना मीटर बदलकर नया स्मार्ट मीटर लगाया गया, उनका मासिक बिजली बिल दो से तीन गुना तक बढ़ गया। जो परिवार पहले 400 से 500 रुपये का बिल पटाते थे, उनका बिल हजारों में आने लगा है।
- ‘सैप सॉफ्टवेयर’ और तकनीकी गड़बड़ी: आपत्तिकर्ताओं ने तकनीकी सबूतों के साथ आयोग को बताया कि पुराने मीटर की अंतिम रीडिंग और नए स्मार्ट मीटर की शुरुआती रीडिंग को जब कंपनियों के ‘सैप सिस्टम’ (SAP Software) में मर्ज किया जाता है, तो वहां भारी तकनीकी खामी आ रही है। इस सॉफ्टवेयर एरर की वजह से उपभोक्ताओं को कई महीनों का संवर्धित (Accumulated) या गलत बिल एक साथ थमा दिया जा रहा है।
- जबरन मीटर थोपने का आरोप: शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि उनकी सहमति के बिना, बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली कंपनी के कर्मचारी जबरन घरों में घुसकर पुराने सही चल रहे मीटरों को उखाड़ रहे हैं और स्मार्ट मीटर टांग रहे हैं। इसका विरोध करने पर कनेक्शन काटने की धमकी दी जाती है।
- सरकारी योजनाओं के बंद होने का खौफ: आम जनता के बीच यह डर और भ्रम भी गहरे से बैठ गया है कि स्मार्ट मीटर पूरी तरह लागू होने के बाद प्रदेश की लोकप्रिय ‘बिजली बिल हाफ योजना’ और बीपीएल (BPL) परिवारों को मिलने वाली सब्सिडी बंद हो जाएगी।
- करोड़ों रुपये की फिजूलखर्ची: सामाजिक कार्यकर्ताओं का तर्क है कि जब वर्तमान में काम कर रहे इलेक्ट्रॉनिक मीटर पूरी तरह से सही और प्रमाणित रीडिंग दे रहे हैं, तो उपभोक्ताओं की जेब और सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये फूंककर नए मीटर खरीदने का क्या औचित्य है?
बिजली कंपनी की दलील: ‘स्मार्ट मीटर तेज नहीं चलते, यह सिर्फ अफवाह है’
उपभोक्ताओं के इन तीखे हमलों और आरोपों पर छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) ने नियामक आयोग के सामने लिखित जवाब और दलीलें पेश की हैं। कंपनी का रुख कुछ इस प्रकार है:
- मानवीय त्रुटि का खात्मा: बिजली कंपनी का कहना है कि स्मार्ट मीटर पूरी तरह से डिजिटल और अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित हैं। इसमें मीटर रीडर के घर न आने, गलत रीडिंग पंच करने या समय पर बिल न बनने जैसी मानवीय गलतियों (Human Errors) की गुंजाइश शून्य हो जाती है।
- सटीक और वास्तविक खपत: डिस्कॉम के अधिकारियों के अनुसार, बिल बढ़ने का कारण मीटर का तेज चलना नहीं है, बल्कि यह है कि स्मार्ट मीटर बिजली की एक-एक बूंद (पल्स) को सटीकता से दर्ज करता है। पुराने मैकेनिकल या कुछ इलेक्ट्रॉनिक मीटरों में जो खपत दर्ज होने से छूट जाती थी, स्मार्ट मीटर उसे भी रिकॉर्ड करता है।
- सब्सिडी बंद होने का दावा खारिज: बिजली कंपनी ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर महज एक ‘रीडिंग डिवाइस’ है। इससे सरकार की किसी भी सब्सिडी योजना पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उपभोक्ताओं को ‘बिजली बिल हाफ योजना’ का लाभ पहले की तरह ही मिलता रहेगा।
- लाइन लॉस और बिजली चोरी पर लगाम: कंपनियों का तर्क है कि बिजली चोरी रोकने, ट्रांसमिशन लॉस कम करने और राज्य की बिजली व्यवस्था को वैश्विक मानकों के अनुरूप पारदर्शी बनाने के लिए स्मार्ट मीटरिंग केंद्र और राज्य सरकार का एक अनिवार्य मिशन है।
नियामक आयोग (CSERC) का ऐतिहासिक हंटर: उपभोक्ताओं के हक में जारी किए 4 बड़े आदेश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने माना कि तकनीकी बदलाव के दौर में उपभोक्ताओं को परेशान नहीं किया जा सकता। आयोग ने अपने नए टैरिफ आदेश और उपभोक्ता संरक्षण नियमों (SoP) के तहत बिजली कंपनियों पर नकेल कसते हुए निम्नलिखित ऐतिहासिक आदेश जारी किए हैं:
1. लापरवाही की तो ₹500 रोजाना जुर्माना (Compensation Clause)
आयोग ने उपभोक्ताओं को सबसे बड़ी सुरक्षा देते हुए साफ किया है कि यदि स्मार्ट मीटर लगने के बाद किसी भी उपभोक्ता के बिल में सॉफ्टवेयर या मीटर खराबी के कारण कोई विसंगति आती है, तो उसे तय समय सीमा के भीतर सुधारना होगा। नगरीय क्षेत्रों में शिकायत दर्ज होने के 7 दिनों के भीतर यदि बिजली कंपनी ने तकनीकी खराबी या गलत बिल को दुरुस्त नहीं किया, तो कंपनी को 500 रुपये प्रति दिन के हिसाब से उपभोक्ता को हर्जाना (क्षतिपूर्ति) देना होगा। यह राशि सीधे उपभोक्ता के खाते में जमा की जाएगी।
2. प्री-पेड विकल्प चुनने पर 1% की सीधी छूट (Rebate on Smart Prepaid)
स्मार्ट मीटर को लेकर जनता के बीच सकारात्मक माहौल बनाने और राहत देने के लिए आयोग ने टैरिफ शेड्यूल में एक विशेष वित्तीय प्रोत्साहन जोड़ा है। जो भी एलवी (Low Voltage) यानी घरेलू और छोटे कमर्शियल उपभोक्ता अपने स्मार्ट मीटर को ‘प्री-पेड मोड’ (Pre-paid Option) में कनवर्ट करवाएंगे, उन्हें उनके कुल ऊर्जा शुल्क (Energy Charge) पर 1% की विशेष छूट दी जाएगी। यानी उपभोक्ता पहले रिचार्ज करेंगे और बिजली इस्तेमाल करने पर उन्हें बिल में सीधी रियायत मिलेगी।
3. ऑपरेशनल एफिशिएंसी सुधारने की सख्त चेतावनी
आयोग ने डिस्कॉम को कड़ी हिदायत दी है कि उनका पूरा ध्यान सिर्फ जमीनी स्तर पर मीटर बदलने की संख्या (Targets) पूरा करने पर नहीं होना चाहिए, बल्कि बैकएंड पर अपने आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और सैप (SAP) सॉफ्टवेयर को अपग्रेड करने पर होना चाहिए। जब तक सॉफ्टवेयर पूरी तरह त्रुटिहीन नहीं हो जाता, तब तक किसी भी उपभोक्ता को संदेहास्पद बिल जारी न किया जाए।
4. लेट पेमेंट का बदला नियम (दैनिक आधार पर गणना)
स्मार्ट मीटरिंग के डिजिटल डेटा ट्रैकिंग सिस्टम को देखते हुए आयोग ने विलंबित भुगतान अधिभार (Delay Payment Surcharge) के नियम को बदल दिया है। अब उपभोक्ताओं पर पूरे महीने का एकमुश्त (1.5%) जुर्माना थोपने के बजाय 0.04% प्रति दिन के हिसाब से चार्ज लगाया जाएगा। इससे उन उपभोक्ताओं को फायदा होगा जो बिल ड्यू डेट के महज 2 या 4 दिन बाद भुगतान करते हैं।
एक नजर में समझें: क्या थी आपत्ति, क्या मिला समाधान?
| विषय / समस्या | उपभोक्ताओं की आपत्ति | नियामक आयोग (CSERC) का अंतिम आदेश |
| गलत बिलिंग / सॉफ्टवेयर एरर | सैप सिस्टम की गड़बड़ी से हजारों के गलत बिल आ रहे हैं। | 7 दिन में सुधार न होने पर बिजली कंपनी देगी ₹500 रोज का जुर्माना। |
| वित्तीय बोझ | नए मीटर से खर्च बढ़ रहा है, कोई फायदा नहीं। | प्री-पेड मोड चुनने वाले उपभोक्ताओं को ऊर्जा शुल्क में मिलेगी 1% की छूट। |
| मनमानी और देरी | शिकायतों पर अधिकारी ध्यान नहीं देते, चक्कर काटने पड़ते हैं। | स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस (SoP) के तहत जवाबदेही तय, लापरवाही पर हर्जाना अनिवार्य। |
| लेट पेमेंट पेनाल्टी | दो दिन लेट होने पर भी पूरे महीने का भारी जुर्माना लगता था। | अब मासिक के बजाय 0.04% प्रतिदिन के हिसाब से लगेगा व्यावहारिक चार्ज। |
चतुरपोस्ट विश्लेषण: तकनीक अच्छी है, लेकिन पारदर्शिता जरूरी
चतुरपोस्ट डॉट कॉम (chaturpost.com) का मानना है कि बिजली वितरण प्रणाली को आधुनिक और घाटे से मुक्त बनाने के लिए स्मार्ट मीटर जैसी डिजिटल तकनीक निश्चित रूप से एक स्वागत योग्य कदम है। लेकिन, किसी भी नए तकनीकी बदलाव को लागू करने से पहले उपभोक्ताओं का भरोसा जीतना लोकतांत्रिक व्यवस्था में सबसे पहली शर्त है।
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बिजली कंपनियों को चाहिए कि वे बलपूर्वक मीटर लगाने के बजाय हर संभाग और सब-स्टेशन स्तर पर ‘स्मार्ट मीटर हेल्प डेस्क’ और ‘फैक्ट-चेक कैंप’ लगाएं, जहां उपभोक्ता अपने पुराने और नए मीटर की रीडिंग का लाइव मिलान कर सकें। नियामक आयोग द्वारा नए टैरिफ ऑर्डर में ₹500 प्रतिदिन जुर्माने का प्रावधान करना उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा, बशर्ते इसका जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।







