
नई दिल्ली/रायपुर। दिल्ली के गलियारों में जब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात हुई, तो चर्चा सिर्फ विकास की नहीं, बल्कि उस सांस्कृतिक जुड़ाव की भी हुई जिसने सदियों से छत्तीसगढ़ को अयोध्या से जोड़े रखा है। सीएम साय ने प्रधानमंत्री को एक ऐसा उपहार भेंट किया, जो सिर्फ एक कलाकृति नहीं, बल्कि प्रदेश की साझा विरासत और अटूट श्रद्धा का प्रतीक है— ‘माता कौशल्या के राम’।
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इस भेंट की खूबसूरती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने खुद इस मुलाकात और सुंदर कलाकृति की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, जो देखते ही देखते वायरल हो गईं।
बेल मेटल में ढली श्रद्धा की कहानी
बस्तर की सुप्रसिद्ध बेल मेटल (ढोकरा कला) से निर्मित यह अद्वितीय प्रतिमा भगवान राम और उनकी माता कौशल्या के गहरे प्रेम को दर्शाती है। उपहार भेंट करते समय मुख्यमंत्री ने बड़े ही आत्मीय भाव से प्रधानमंत्री को बताया कि छत्तीसगढ़ भगवान राम का ननिहाल है। यहाँ राम सिर्फ भगवान नहीं, बल्कि घर-घर के ‘भांजे’ हैं।
“यह कलाकृति हमारे प्रदेश की आस्था, परंपरा और सृजनशीलता का सजीव प्रतिरूप है। यह बस्तर के जनजातीय समाज के उस अटूट कौशल को दर्शाती है, जिसे उन्होंने हजारों सालों से संजोकर रखा है।” – विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री
सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सुशासन का संगम
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की सांस्कृतिक चेतना जागृत हुई है, उसी की एक कड़ी छत्तीसगढ़ सरकार की ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ भी है। इसके माध्यम से हजारों छत्तीसगढ़िया श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन कर पा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ‘राम राज्य’ की अवधारणा से प्रेरित होकर सेवा, संस्कार और सुशासन के पथ पर आगे बढ़ रही है।
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खास क्यों है ‘बेल मेटल‘ और यह कलाकृति?
अगर आप सोच रहे हैं कि यह उपहार इतना खास क्यों है, तो इसका जवाब बस्तर की मिट्टी और आग के खेल में छिपा है:
- प्राचीन विरासत: यह कला लगभग 4,000 साल पुरानी है। सिंधु घाटी सभ्यता की प्रसिद्ध ‘डांसिंग गर्ल’ भी इसी तकनीक से बनी थी।
- अद्वितीय तकनीक: इसे ‘लॉस्ट वैक्स तकनीक’ (Lost Wax Technique) से बनाया जाता है। खास बात यह है कि एक मूर्ति बनाने के बाद उसका सांचा तोड़ दिया जाता है, यानी दुनिया में वैसी दूसरी हूबहू मूर्ति कभी नहीं बन सकती।
- धातु का विज्ञान: बेल मेटल तांबे (करीब 80%) और टिन (20%) का मिश्रण है। इसकी खनक और मजबूती इसे अन्य धातुओं से अलग बनाती है।
- बस्तर की पहचान: छत्तीसगढ़ के बस्तर में यह शिल्प सिर्फ कला नहीं, बल्कि वहां की जनजातीय संस्कृति की पहचान है।
चतुर चर्चा: इस भेंट के जरिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने न केवल दिल्ली के दरबार में छत्तीसगढ़ के शिल्पकारों का मान बढ़ाया है, बल्कि ‘राम का ननिहाल’ वाले भावनात्मक कार्ड के जरिए छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय पटल पर मजबूती से रेखांकित किया है।







