
रायपुर (Chaturpost News Desk): छत्तीसगढ़ के गलियारों में इस वक्त पेंशनरों के हक की गूंज सुनाई दे रही है। सालों तक शासन-प्रशासन की रीढ़ बनकर सेवा देने वाले बुजुर्ग आज अपनी ही जमा पूंजी और हक के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ (Bhartiya Rajya Pensioners Mahasangh) ने राज्य सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है।
महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव और प्रदेश महामंत्री प्रवीण कुमार त्रिवेदी ने एक संयुक्त विज्ञप्ति (Press Release) जारी कर सरकार को स्पष्ट चेतावनी (Warning) दी है। उन्होंने कहा कि पेंशनरों के साथ हो रहा यह व्यवहार न केवल अपमानजनक है, बल्कि उनके संवैधानिक “समानता के अधिकार” (Right to Equality) का खुला उल्लंघन भी है।
2000 करोड़ का हिसाब कहाँ? गंभीर सवालों के घेरे में सरकार
पेंशनर महासंघ का सबसे बड़ा आरोप मध्य प्रदेश से प्राप्त होने वाली राशि को लेकर है। गौरतलब (Notably) है कि मध्य प्रदेश से लगभग 2000 करोड़ रुपये की राशि छत्तीसगढ़ को प्राप्त हो चुकी है। बावजूद इसके, पेंशनरों के लंबित महंगाई राहत (Dearness Relief – DR) के वितरण पर अब तक कोई सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ है।
पेंशनर नेताओं का कहना है कि सरकार की इस चुप्पी (Silence) से राज्य के लाखों बुजुर्गों में असुरक्षा और संवेदनशीलता के अभाव का संदेश जा रहा है। Chhattisgarh Pensioners News इस समय राज्य के हर जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर आर्थिक न्याय से जुड़ा है।
अधिकारियों की ‘दोहरी चाल’ पर महासंघ का प्रहार
पेंशनर महासंघ ने राज्य के कुछ उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी तीखे सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारी (Senior Officials) स्वयं के वेतन और भत्तों (Allowances) के मामले में तो अत्यंत सक्रिय (Active) रहते हैं, लेकिन जब बात पेंशनरों या छोटे कर्मचारियों की आती है, तो वे उदासीनता बरतते हैं।
महासंघ ने सीधे तौर पर कहा कि कुछ नौकरशाह सरकार को गलत जानकारी देकर गुमराह (Misleading) कर रहे हैं। इन अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी देरी न हो। Transition words के तौर पर देखा जाए तो, आखिरकार (Finally) अब बुजुर्गों का धैर्य जवाब दे गया है।
प्रदेशव्यापी आंदोलन की आहट: ‘अब और इंतजार नहीं’
पेंशनर महासंघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यह उनकी आखिरी गुहार है। यदि सरकार ने शीघ्र ही महंगाई राहत (DR) के आदेश जारी नहीं किए, तो महासंघ पूरे राज्य में उग्र आंदोलन (Protest) छेड़ने के लिए बाध्य होगा। इस संभावित आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
अपनी रणनीति (Strategy) को साझा करते हुए महासंघ ने बताया कि वे इस गंभीर विषय को निम्नलिखित उच्च अधिकारियों के संज्ञान में ला रहे हैं:
- माननीय राज्यपाल (Governor)
- मुख्यमंत्री (Chief Minister)
- मुख्य सचिव (Chief Secretary)
- वित्त सचिव (Finance Secretary)
सम्मान और न्याय की पुकार
खबर के अंत में, कार्यकारी प्रांताध्यक्ष जे पी मिश्रा, प्रदेश महामंत्री अनिल गोल्हानी, और संगठन मंत्री टी पी सिंह ने संयुक्त रूप से सरकार से अपील की है। रायपुर संभागीय अध्यक्ष शैलेन्द्र सिन्हा और जिला अध्यक्ष आर जी बोहरे का भी मानना है कि पेंशनरों ने अपनी जवानी राज्य के विकास में लगा दी, अब बुढ़ापे में उन्हें हक के लिए तड़पाना निंदनीय (Condemnable) है।
Expert Opinion: जानकारों का मानना है कि चुनाव के बाद और बजट सत्र के आसपास पेंशनरों की नाराजगी सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। यदि Chhattisgarh Pensioners News का समाधान जल्द नहीं हुआ, तो यह मुद्दा राजनीतिक रूप भी ले सकता है।
पेंशनर महासंघ की केवल एक ही मांग है – “सम्मान, अधिकार और न्याय।” अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री इस पर क्या संज्ञान लेते हैं।
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