
नई दिल्ली, न्यूज डेस्क। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। इसी कड़ी में रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने नए वेतन आयोग के सामने एक बेहद महत्वपूर्ण मांग पत्र यानी मेमोरेंडम (Memorandum) पेश किया है। इस मांग पत्र में सीनियर सिटीजन्स और रिटायर्ड रेल कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई चौंकाने वाले बदलावों की मांग की गई है।
रेलवे पेंशनर्स एसोसिएशन का कहना है कि सरकार को अब पेंशनभोगियों के सुरक्षित भविष्य और गरिमापूर्ण जीवन (Social Security) को प्राथमिकता देनी होगी। वर्तमान व्यवस्था में कई ऐसी विसंगतियां हैं, जिन्हें अगर 8th Pay Commission में नहीं सुधारा गया, तो महंगाई के इस दौर में बुजुर्गों का जीना दूभर हो जाएगा।
🔴 आखिर क्यों परेशान हैं रेलवे के बुजुर्ग पेंशनर्स?
RSCWS ने सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर (Compensation System) में एक बहुत बड़ी बुनियादी कमी है। वर्तमान में कर्मचारियों को बेसिक पे (Basic Pay) के मुकाबले भत्तों (Allowances) पर ज्यादा निर्भर रखा जाता है।
बड़ा नुकसान: नौकरी के दौरान तो भत्ते अच्छे लगते हैं, लेकिन जैसे ही कर्मचारी रिटायर होता है, ये सारे अलाउंसेस बंद हो जाते हैं। नतीजा यह होता है कि रिटायर्ड कर्मचारी की वास्तविक आय (Real Income) अचानक से बहुत नीचे गिर जाती है, जबकि बुढ़ापे में मेडिकल खर्च और घरेलू जरूरतें तेजी से बढ़ती हैं।
इसीलिए, रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी ने इस बार बेसिक पे को मजबूत करने और पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) को वापस लाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। आइए जानते हैं इस मेमोरेंडम की 5 सबसे बड़ी बातें।
1. पेंशन और रिटायरमेंट बेनिफिट्स पर आर-पार की लड़ाई
संगठन ने साफ किया है कि जब तक पेंशन नियमों में बदलाव नहीं होगा, तब तक वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) मिलना मुश्किल है। इसके लिए निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं:
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली: साल 2004 के बाद भर्ती हुए और रिटायर होने वाले सभी कर्मचारियों के लिए Old Pension Scheme (OPS) को तुरंत दोबारा लागू किया जाए ताकि उन्हें बुढ़ापे में एक निश्चित आय मिल सके।
- ‘वन रैंक वन पेंशन’ (OROP) की तर्ज पर समानता: एक ही रैंक और समान सेवा अवधि वाले सभी पेंशनर्स को एक बराबर पेंशन मिलनी चाहिए, चाहे उनकी रिटायरमेंट की तारीख (Date of Retirement) कुछ भी हो।
- कम्युटेशन बहाली की अवधि कम हो: पेंशन कम्युटेशन (पेंशन के बदले एकमुश्त राशि लेना) की रिकवरी अवधि को मौजूदा 15 साल से घटाकर 10 से 12 साल किया जाए।
- ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट की सीमा बढ़े: मृत्यु-सह-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी (DCRG) और अर्जित अवकाश के बदले मिलने वाले पैसे की अधिकतम सीमा में महंगाई के अनुपात में समय-समय पर बढ़ोतरी की जानी चाहिए।
2. सैलरी स्ट्रक्चर और इंक्रीमेंट को लेकर नए फॉर्मूले की मांग
केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में वास्तविक बढ़ोतरी (Real Wage Growth) तभी संभव है जब बेसिक सैलरी का ढांचा सुधरेगा। RSCWS ने इसके लिए एक वैज्ञानिक तरीका अपनाने को कहा है:
- वार्षिक इंक्रीमेंट 5% हो: वर्तमान में सालाना वेतन वृद्धि (Annual Increment) की दर 3% है, जिसे बढ़ाकर न्यूनतम 5% करने की मांग की गई है।
- वैज्ञानिक आधार पर न्यूनतम वेतन: 8वें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन की गणना 1 जनवरी 2026 के प्राइस इंडेक्स (Price Index) को आधार मानकर की जानी चाहिए।
- दमदार फिटमेंट फैक्टर: नए वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) ऐसा होना चाहिए जो केवल महंगाई भत्ते (DA) के असर को खत्म न करे, बल्कि कर्मचारियों की जेब में असली पैसा भी बढ़ाए। इसके साथ ही पे मैट्रिक्स (Pay Matrix) की विसंगतियों को दूर किया जाए ताकि प्रमोशन मिलने पर अच्छा आर्थिक लाभ दिखे।
3. हेल्थकेयर और मेडिकल सुविधाओं का हो केंद्रीकरण
बुढ़ापे में सबसे बड़ा खर्च बीमारी पर होता है। कैशलेस इलाज (Cashless Treatment) को लेकर सीनियर सिटीजन्स ने बेहद व्यावहारिक मांगें उठाई हैं:
- मंत्रालय स्तर पर हो पैनल: प्राइवेट अस्पतालों को पैनल में शामिल करने (Empanelment) का काम अलग-अलग विभागों पर छोड़ने के बजाय, सीधे स्वास्थ्य मंत्रालय या CGHS के स्तर पर केंद्रीकृत (Centralize) किया जाए।
- इलाज की पूरी आजादी: पेंशनर्स को देश के किसी भी अत्याधुनिक या बड़े अस्पताल में इलाज कराने की पूरी छूट होनी चाहिए। उन्हें केवल चुनिंदा रेलवे या सरकारी अस्पतालों तक ही सीमित न रखा जाए।
- मेडिकल क्लेम का त्वरित निपटारा: सभी मेडिकल बिलों का रीइंबर्समेंट (Reimbursement) बेहद सरल, पारदर्शी और कैशलेस तरीके से तय समय सीमा के भीतर होना चाहिए।
4. करियर प्रोग्रेशन और MACP नियमों में सुधार
कर्मचारियों के समय पर प्रमोशन न होने से उनके रिटायरमेंट और पेंशन पर भी बुरा असर पड़ता है। इसके लिए मेमोरेंडम में कहा गया है:
- MACP का अंतराल आधा हो: मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) के तहत वित्तीय अपग्रेडेशन का समय 10 साल से घटाकर 5 साल किया जाना चाहिए।
- सीनियर-जूनियर वेतन विसंगति दूर हो: पे-मैट्रिक्स के कुछ अजीब नियमों के कारण कई बार जूनियर कर्मचारियों की सैलरी उनके सीनियर से ज्यादा हो जाती है। इस विसंगति (Pay Anomalies) को तुरंत ठीक किया जाए।
- समयबद्ध पदोन्नति: विभागीय प्रोमोशन कमेटियों (DPCs) की बैठकें समय पर होनी चाहिए ताकि कर्मचारियों को एक ही पद पर सालों तक न सड़ना पड़े।
5. भत्ते, एडवांस और डिजिटल वेलफेयर पर ध्यान
डिजिटल होते भारत में अब बुजुर्गों को भी आधुनिक गैजेट्स की जरूरत है। मेमोरेंडम में इस बात को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है:
- भत्तों में ऑटोमैटिक बढ़ोतरी: हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस जैसे प्रमुख भत्तों में महंगाई सूचकांक के आधार पर खुद-ब-खुद संशोधन (Automatic Revision) होना चाहिए।
- डिजिटल एडवांस की सुविधा: पर्सनल कंप्यूटर एडवांस का दायरा बढ़ाकर उसमें लैपटॉप और टैबलेट को भी शामिल किया जाए। साथ ही पेंशनर्स को डिजिटल रूप से साक्षर और कनेक्टेड रखने के लिए वित्तीय सहायता दी जाए।
- CGEGIS का अपग्रेडेशन: सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम (CGEGIS) के तहत मिलने वाले इंश्योरेंस कवर और मैच्योरिटी बेनिफिट्स को आज के आर्थिक दौर के हिसाब से काफी ज्यादा बढ़ाया जाना चाहिए।
📝 एक्सपर्ट व्यू और निष्कर्ष
chaturpost.com एनालिसिस डेस्क: रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) द्वारा उठाया गया यह कदम देश के लाखों रिटायर्ड रेल कर्मियों के हक की आवाज है। रेलवे जैसे महत्वपूर्ण विभाग में अपनी जिंदगी खपाने वाले इन बुजुर्गों की यह मांगें पूरी तरह तर्कसंगत हैं। अगर सरकार 8th Pay Commission के गठन के साथ ही इन मांगों पर सकारात्मक विचार करती है, तो यह देश के सोशल सिक्योरिटी मॉडल के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। अब देखना यह है कि वित्त मंत्रालय इस मेमोरेंडम पर आगे क्या रुख अपनाता है।







